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उम्रकैद से बचे, 35 साल की सजा में अटके

Mon, 23 Sep 2013 11:13 AM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली Updated Mon, 23 Sep 2013 11:13 AM IST
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save life imprisonment but stuck in 35 year sentence

आसमान से गिरे और खजूर में अटके! हत्या और अपहरण मामले में दोषी करार दिए गए पंजाब के एक डीएसपी और कांस्टेबल के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में तो उन्हें बरी करते हुए उम्रकैद की सजा से निजात दिला दी। लेकिन एक ही परिवार के सात लोगों के अपहरण का दोषी मानते हुए प्रत्येक मामले में 5-5 साल कैद की सजा दे दी।
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यह सजा एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चलेगी, जो चौदह साल की उम्रकैद की अवधि से दोगुने से भी ज्यादा है।

सर्वोच्च अदालत ने फैसले में कहा कि सात लोगों को अलग-अलग पुलिस थानों से उठाया गया। ऐसे में अदालत यह नहीं तय कर सकती कि दो आरोपियों ने अपहरण कर सभी को मार डाला क्योंकि सातों लोग अभी तक खोजे नहीं जा सके हैं।
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राज्य का कहना है कि सभी थाने आरोपी डीएसपी बलदेव सिंह के नियंत्रण में थे। लेकिन ऐसा कोई सुबूत अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया, जो स्पष्ट करता हो कि सभी थाने आरोपी के नियंत्रण में थे।


पुलिस की ओर से सातों लोगों को उठाने की कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताई गई। हालांकि इसके बाद सभी गायब हो गए।

लेकिन साक्ष्य में यह सामने आया है कि सभी गायब लोग आरोपी डीएसपी और कांस्टेबल की हिरासत में थे। लेकिन इन सभी की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और सभी अब तक गायब हैं।

जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसे में हत्या करने के दोष से दोनों आरोपियों को अदालत मुक्त करती है।

लेकिन सातों के अपहरण का दोषी मानते हुए दोनों को प्रत्येक मामले में पांच-पांच साल की सजा देती है और चार-चार हजार रुपए का जुर्माना करती है।

पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह सजा एक अवधि में नहीं चलेगी, बल्कि प्रत्येक मामले की पांच साल की कैद दोषियों को अलग-अलग और क्रमानुसार काटनी होगी।

अदालत ने यह फैसला डीएसपी और कांस्टेबल बलविंदर सिंह की अपील पर दिया है।

गौरतलब है कि दोनों ने हाईकोर्ट की ओर से उनकी अपील अप्रैल, 2005 में खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

घटनाक्रम के मुताबिक जनवरी, 1992 में इंदर सिंह नाम के व्यक्ति ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को अपने परिवार के सात लोगों को पुलिस की ओर से अक्टूबर, 1991 में उठाए जाने के संबंध में पत्र भेजा। पत्र में सभी की हत्या की आशंका भी जताई गई।

इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और निचली अदालत ने हत्या, अपहरण के मामले में दोनों पुलिसवालों को दोषी करार दिया।

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