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पढ़ें, यूपी में कैसे 'बाल मित्र' बन गए कैलाश सत्यार्थी?

Sat, 11 Oct 2014 10:54 AM IST
योगेश नारायण दीक्षित/अमर उजाला, दिल्ली
योगेश नारायण दीक्षित/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 11 Oct 2014 10:54 AM IST
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satyarthi operates a special drive against human trafficking.

मानव तस्करी का बड़ा हब बन रहे यूपी के तराई इलाके में बचपन को बचाने के लिए कैलाश सत्यार्थी ने नया प्रयोग किया है।

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उन्होंने नेपाल से सटे इलाकों में बालमित्र गांव बनाए हैं। इनमें ग्राम पंचायतें बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के साथ विकास योजनाएं बनाते समय उनके हित को ध्यान में रखती हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता सत्यार्थी ने तराई के लखीमपुर-खीरी और बहराइच से लेकर पूर्वांचल के मिर्जापुर तक 30 जिलों में बालमित्र गांव स्थापित करने के लिए 25-25 ग्राम पंचायतें चुनी हैं। यहां बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से बचाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंच लेते हैं।
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इसके अलावा वे अपनी बैठक में बच्चों को शामिल करते हैं और योजना बनाते समय ये ध्यान रखते हैं कि बाल मन पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।

कई नेताओं को साथ ले कर रहे हैं काम

satyarthi operates a special drive against human trafficking.

सत्यार्थी के निकट सहयोगी और लखीमपुर-खीरी के पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने फोन पर बताया कि नेपाल से लगते यूपी-बिहार के जिलों में सबसे ज्यादा बच्चे गायब होते हैं।

लोकसभा  सांसद रहते वर्ष 2006 में जब उन्होंने सत्यार्थी से इसका जिक्र किया तो तराई में मानव तस्करी पर अध्ययन किया।

उन्होंने माना कि समस्या गंभीर है और देश के कई नामी लोगों और सांसदों को साथ लेकर पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश बार्डर से लेकर यूपी में तराई के सभी जिलों को शामिल करते हुए बाल तस्करी और बालश्रम के खिलाफ मार्च निकाला।

वे लखीमपुर से होते हुए नेपाल के धनगढ़ी और महेंद्रगढ़ तक गए और नेपाली लोगों से मानव तस्करी रोकने में मदद मांगी।

कैलाश सत्यार्थी इस समय ग्लोबल मार्च इंडिया फाउंडेशन ऑन एजुकेशन के जरिए सबके लिए समान शिक्षा के लिए काम कर रहे़ हैं। इसके जरिए वे देश में एडहॉक के बजाए कॉमन शिक्षा के लिए आवाज बुलंद दकर रहे हैं।

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