'मोदी के दबाव में लागू हुआ जाट आरक्षण'
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आईपीएस की नौकरी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सतपाल सिंह जाट आरक्षण का श्रेय नरेंद्र मोदी के सिर बांध रहे हैं।
सतपाल का कहना है कि यूपीए सरकार ने भले ही आनन फानन में जाट आरक्षण को लागू किया हो लेकिन यह मोदी का ही आभा मंडल और प्रभाव था जिसने सरकार पर इसे लागू करने का दबाव बनाया।
'भाजपा ने लागू किया था पहले आरक्षण'
सतपाल का कहना है कि यह भाजपा ही है जो जाट समुदाय के लिए आरक्षण की वकालत लंबे समय से करती आ रही है।
फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि 20 साल से लटकते आ रहे इस मुद्दे पर यूपीए सरकार में आम सहमति बन गई और इसे आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले लागू कर दिया गया।
नरेंद्र मोदी के दबाव ने जाट समुदाय के लिए आरक्षण लागू करने में मुख्य भूमिका निभाई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में सबसे पहले भाजपा सरकार ने ही जाटों के लिए आरक्षण लागू किया था।
इसे भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने लागू किया था। इसके बाद राजस्थान में वसुंधरा राजे ने इसे लागू किया।
अजीत ले रहे हैं आरक्षण का श्रेय
बागपत में रालोद सुप्रीमो अजित सिंह को लोकसभा चुनाव में चुनौती देने के लिए मैदान में उतरे सतपाल ने कहा कि अजित जाट आरक्षण का श्रेय मुफ्त में ले रहे हैं। उन्होंने पहले इसके लिए कुछ नहीं किया।
सतपाल का यह भी मानना है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले जाटों को आरक्षण से जरूर कुछ फायदा मिल सकता है। इसका कारण सरकारी नौकरियों का प्रतिशत 1.8 है। लेकिन 98 फीसदी नौकरियां निजी क्षेत्र में हैं। ऐसे में गांवों में रहने वाले जाटों को इसका ज्यादा फायदा नहीं मिलने वाला है।