ममता के लिए गले की फांस बना शारदा घोटाला
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बांग्ला में एक मशहूर कहावत है ‘किसी का पौष मास, किसी का सर्वनाश’ यानी किसी की पौ-बारह है तो किसी का सर्वनाश हो रहा है। पश्चिम बंगाल में शारदा चिटफंड घोटाला इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए यह घोटाला एक ऐसा दलदल बन गया है, जिसमें से ममता बनर्जी जितना निकलते की कोशिश करती हैं, उतनी ही फंसती नजर आ रही हैं। दूसरी ओर, राज्य में अपना राजनीतिक वजूद बनाने में जुटी भाजपा के लिए यह घोटाला वरदान बन गया है।
एक जमाने में तृणमूल के नेताओं ने ही शारदा समूह को फलने फूलने के लिए खाद-पानी मुहैया कराया। अब उसका वही दांव उल्टा पड़ गया है। पार्टी के तमाम सांसद सीबीआई की गिरफ्त में हैं। एक दिन पहले ही राज्यसभा सदस्य सृंजय बोस ने घोटाले में जेल की हवा खाने के बाद सांसदी के साथ राजनीति से भी तौबा कर ली।
तृणमूल नेता और राज्य महिला आयोग की सदस्य अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। इनसे पहले भी एक मंत्री और कई नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। सांसद कुणाल घोष और परिवहन मंत्री मदन मित्रा जेल की हवा खा रहे हैं।
मुकुल पर संशय
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल राय से भी सीबीआई पूछताछ कर चुकी है। तृणमूल की इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को मिल रहा है। वह दबाव बढ़ाने की कोई भी कोशिश हाथ से नहीं जाने दे रही है।
करीबी मुकुल राय को लेकर ममता बनर्जी संशय में हैं। दीदी और उनके करीबी नेताओं के मन में यह सवाल है कि आखिर सीबीआई ने पूछताछ के बाद मुकुल को बिना गिरफ्तार किए कैसे छोड़ दिया? पार्टी के दूसरे नेताओं को तो लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।
दूसरी ओर, मुकुल ने यह कह कर भी चिंता बढ़ा दी है कि वे सौ बार सीबीआई के पास जाने के लिए तैयार हैं। ममता ने अपनी ओर से तो मुकुल के पर कतर दिए हैं, लेकिन उनको इस सवाल के जवाब की तलाश है कि आखिर मुकुल ने सीबीआई को क्या बताया।