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सरबजीत के लिए परिवार ने मांगा शहीद का दर्जा
नई दिल्ली/इस्लामाबाद/एजेंसी
Updated Thu, 02 May 2013 11:30 AM IST
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भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की लाहौर के जिन्ना अस्पताल में बुधवार व गुरुवार की दरम्यानी रात मौत हो गई। उनके घरवालों ने सरबजीत को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
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घरवालों ने सरबजीत का शव भी उनके सूपुर्द करने के मांग की है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान सरकार ऐसा करेगी या नहीं।
टीवी चैनलों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत के पोस्टमार्टम के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया है।
पढ़िए सरबजीत की पूरी कहानी
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष राज कुमार विर्का ने बताया कि उनकी बेटियां यह बताना चाहती हैं कि उनके पिता कातिल नहीं हैं। इसीलिए उन लोगों ने सरकार से सरबजीत को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
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इससे पूर्व पाकिस्तानी डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने उनकी मौत की पुष्टि की।
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार सरबजीत की मौत रात को एक बजे हुई।
पाक मीडिया के अनुसार रात को ही सरबजीत का शव मॉर्चरी (मुर्दाघर) में भेज दिया गया। सरबजीत सिंह का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को होगा।
हमला
सरबजीत 26 अप्रैल को कोट लखपत जेल में छह कैदियों के जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल होने के बाद कोमा में चला गया था। उसके सिर, गर्दन और पेट में गंभीर चोटें थीं।
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डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत में कभी भी सुधार नहीं देखा गया। पाकिस्तानी डॉक्टरों ने पहले उसके ‘डीप कोमा’ में जाने की बात कही और बुधवार को उन्होंने उसके ‘इररिवर्सिबल कोमा’ में जाने की घोषणा की, जिसका मतलब था कि वह कभी वापस होश में नहीं आएगा।
जिंदगी और मौत के बीच सरबजीत के छह दिन
पिछले साल भारत में मुंबई हमलों के दोषी पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को फांसी दिए जाने के बाद से लाहौर जेल में सरबजीत पर हमले की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
नहीं बरती चौकसी
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को इस संबंध में तीन बार चेतावनी दी थी। भारत ने पाकिस्तान से भी इस संबंध में कहा था, लेकिन उसने चौकसी नहीं बरती।
जानिए, कैसे लिखी गई सरबजीत की मौत की स्क्रिप्ट
सरबजीत पर इस हमले के बाद पाकिस्तान ने उसके परिवार को अपने यहां आने की इजाजत देते हुए पंद्रह दिन का वीजा जारी किया था, लेकिन परिवार बुधवार को ही भारत लौट आया।
उसने वहां सरबजीत का सही ढंग से इलाज न होने और डॉक्टरों द्वारा उनकी बात न सुने जाने की शिकायत की। साथ ही उन्होंने तालिबान हमले की आशंका भी व्यक्त की।
परिजन लगातार मांग कर रहे थे कि सरबजीत को इलाज के लिए भारत भेजा जाए। भारत भी इस संबंध में लगातार पाकिस्तान से कहा था।
भारत ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान चाहे तो वह सरबजीत को बेहतर इलाज के लिए किसी तीसरे देश में भी भेज सकता है। लेकिन पाकिस्तान नहीं माना।
क्या शव सौंपेगा पाक
सरबजीत का शव पाकिस्तान क्या भारत को सौंपेगा? इस संबंध में देर रात तक पाकिस्तान की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया गया।
हालांकि इससे पहले शाम को जब सरबजीत जीवित था तब पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों ने यह जरूर कहा था कि उसे भारत को सौंपने पर पाक सकारात्मक विचार कर रहा है।
कब हुआ था हमला
लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत पर 26 अप्रैल को छह कैदियों ने ईंट, धारदार हथियारों से हमलाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसे जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सरबजीत उसी दिन से कोमा में था।
क्या था मामला
49 वर्षीय सरबजीत को 1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुए बम धमाके में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस धमाके में 14 लोगों की जान गई थी।
गिरफ्तारी के बाद सरबजीत को फांसी की सजा सुनाई गई थी। बाद में सरबजीत ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खारिज कर दिया था।
हालांकि 2008 में पाकिस्तान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार आने पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हस्तक्षेप के चलते फांसी की सजा लटकी हुई है।
सरबजीत का परिवार और भारत इस मामले को गलत पहचान का मामला बताता है।