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डायरी में सिमटा है सरबजीत का दर्द

Sat, 18 May 2013 08:59 AM IST
योगेश नारायण दीक्षित
योगेश नारायण दीक्षित Updated Sat, 18 May 2013 08:59 AM IST
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sarabjit singh diary

वतन वापसी के सपने देखते-देखते सरबजीत सिंह की आंखें हमेशा के लिए बंद हो गई।

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पिछले 23 साल में उसने लाहौर की कोट लखपत जेल में न जाने कितने ही दर्द झेले, कितने ही ख्याल उसके मन में आए, जिन्हें वह कभी अपने परिवार से साझा नहीं कर पाया।

मगर इस अकेलेपन में एक डायरी उनके दर्द की साथी बनी, जिसमें 23 साल के इंतजार में एक-एक दिन का हिसाब है।

एक-एक आंसू, एक-एक उम्मीद इस डायरी में दर्ज है। सरबजीत तो जेल की चारदीवारी से कभी बाहर नहीं आ पाया, लेकिन अब उसका परिवार उसकी डायरी समेत अंतिम निशानियां हिंदुस्तान वापस लाना चाहता है।
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इसी के मद्देनजर सरबजीत की बहन दलबीर कौर और बेटी पूनम ने शुक्रवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से उनके आवास पर मिलकर गुहार लगाई है कि वह लाहौर की कोट लखपत जेल में रखी सरबजीत की निशानियों को मंगाने के लिए मदद करें।
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परिवार गृहमंत्री और केंद्र सरकार के अन्य मंत्रियों से मिलकर सरबजीत का सामान मंगवाने के लिए पाक सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह करेगा।

राहुल से उनके तुगलक लेन स्थित आवास पर शुक्रवार सुबह मुलाकात के बाद दलबीर कौर ने अमर उजाला को बताया कि कांग्रेस उपाध्यक्ष से मिले आश्वासन से उन्हें उम्मीद बंधी है कि सरबजीत का सामान लाहौर जेल से वापस मंगाने के लिए केंद्र सरकार पहल करेगी।

उन्होंने बताया कि राहुल ने पूनम कौर से काफी देर बात करके परिवार का हाल-चाल जाना। राहुल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्र की यूपीए सरकार परिवार की आगे भी मदद करती रहेगी।

दलबीर कौर ने बताया कि कोट लखपत जेल में सरबजीत की डायरी के अलावा हनुमान चालीसा और शनि चालीसा है, जिसका वह नियमित पाठ करता था।

उसने जेल में कुछ चूड़ियां बनाई थीं और उसके खाते में जेल में कमाए रुपये भी जमा हैं। वह हमेशा अपने पास पवित्र ग्रंथ की प्रति भी रखता था, जिसे परिवार अपने गांव तरनतारन के भिखीविंड में रखना चाहता है।


तिहाड़ में पाक कैदियों से मिलने की तमन्ना
दलबीर और पूनम कौर शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री और तिहाड़ जेल प्रशासन से मिलकर उन पाकिस्तानी कैदियों से मुलाकात की अनुमति मांगेंगी जो गंभीर आरोप न होने के बावजूद कई सालों से कैद हैं।

सरबजीत का परिवार अब भारत और पाक में बंद उन कैदियों की रिहाई के लिए प्रयास करेगा जो पैरवी न हो पाने की वजह से वर्षों से जेल में बिता चुके हैं।

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