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संविधान बदलना आत्महत्या करनाः मोदी

Fri, 27 Nov 2015 07:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 27 Nov 2015 07:20 PM IST
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All PMs' contributed in the progress of the country:Modi

लोकसभा में संविधान पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है। साथ ही उन्होंने चर्चा में भागीदारी निभाने के लिए सबको धन्यवाद दिया और कहा कि मैं भी आप जैसा हूं।

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उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने में सभी सरकारों में रहे प्रधानमंत्रियों ने योगदान दिया है और शायद मैं ही हूं जिसने लालकिले के प्रचीर से यह बात को कहा है। उन सब के योगदान से ही देश जहां है वहां तक पहुंचा है।
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26 नवंबर को उजागर करने की जरूरत है क्योंकि ये एक ऐतिहासिक घटना है इसे उजागर करके 26 जनवरी को नीचा दिखाने का कोई उद्देश्य नहीं है। जरूरत है कि संविधान के बारे में जन-जन तक जानकारी पहुंचे।
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सरकार की सोच है कि संविधान दिवस के द्वारा संसद के सिर्फ लोकसभा तक न सिमित रखके जनसभा तक ले जाया जाए। इस दिन डिबेट हो, ऑनलाइन कंपेटिशन आयोजित किया जाए, इसे स्कूलों- कॉलेजों में आयोजित किया जाए।

इस देश के सभी प्रधानमंत्री 12 त्योहार मनाए जाते हैं और 1600 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं उनकों सोचकर कानून बनाना बाबा साहब ही कर सकते थे। हम एक कानून को बनाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। उनके इस योगदान को सदन से बाहर जाकर सबको जानना चाहिए। इससे भारत का लोकतंत्र मजबूत करने में हमे मदद मिलेगी।

अब नहीं फंसेगा किसी श्रमिक का धन

All PMs' contributed in the progress of the country:Modi

आज जो कानून बन रहे वह ठीक से नहीं बन रहे हमे बार-बार बदलाव करने पड़ते हैं। यदि सभी अधिकार की जगह अपने योगदान की बात करेंगे तो देश का उत्‍थान होगा।

संविधान के बनने के अंतिम चरण में राजेंद्र बाबू ने कहा कि आश्वासन देते हैं भूख और गरीबी को समाप्त करेंगे और सभी को सुख की प्राप्‍ति होगी। लेकिन आज के समय में संव‌िधान हमारे पास है हम जानते हैं कि कैसे इसे तैयार किया गया है, कोई इसे बदलने का सोच ही नहीं सकता है इसे बदलना आत्महत्या करने से कम नहीं है।

हमें ध्यान उसमें लगाना चाहिए कि देशवासियों के उत्‍थान कैसे किया जाए। ये बाबा साहब है जिन्होंने आठ घंटे काम करने का समय तय किया ये किसी महापुरूष के योगदान का जीता जागता नमूना है।

हमारी सरकार ने श्रमिकों को एलआईएन नंबर दिया है ताकि वह जहां भी कार्य करें उनका बकाया धन उन्हें मिल जाए क्योंकि पहले जब वह एक शहर से दूसरे शहर चले जाते थे तब कम पढ़े लिखे होने के कारण उनके जमा राशि उसी बैंक में रह जाती थी अब ये परेशानी उन्हें नहीं होगी।

दूसरी ओर हमने पेंशनर्स के लिए एक हजार रुपए की पेंशन तय कर दी है। साथ ही एक नए एक्ट को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है जिसके पास होते ही न्यूनतम बोनस 3500 हजार से 7000 हजार रुपए हो जाएगा।

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