फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Santosh Kumar, who got PMO funds for kidney transplant, dies on waitlist

PMO फंड के बाद भी वेटिंग लिस्ट ने ली संतोष की जान

Sat, 04 Jul 2015 06:53 PM IST
Updated Sat, 04 Jul 2015 06:53 PM IST
विज्ञापन
Santosh Kumar, who got PMO funds for kidney transplant, dies on waitlist

किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए पीएम कार्यालय से करीब पांच महीने पहले ही सहायता मिलने के बाद भी वाराणसी के 33 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई। बुधवार की सुबह अपनी बारी का इंतजार कर रहे इस युवक ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

विज्ञापन

 
पीएम कार्यालय ने संतोष कुमार के नाम पर फरवरी माह में ही लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई अस्पताल में 2.17 लाख रुपये जमा करा दिए थे। लेकिन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह अगले आठ महीनों तक किडनी सर्जरी के किसी भी नए मामले के निस्तारण की स्थिति में नहीं है।
विज्ञापन


वाराणसी से लेकर लखनऊ तक के बीजेपी नेताओं ने इस युवक ईलाज के लिए अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। बताया जाता है कि संतोष के परिजनों का छह साल पहले ही निधन हो गया था और वह फिलहाल अपनी बड़ी बहिन रीता के घर रह रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


फोटो साभार- द इंडियन एक्सप्रेस

4.37 लाख का मिला था इस्टीमेट

Santosh Kumar, who got PMO funds for kidney transplant, dies on waitlist

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र की रहने वाली रीता को पीजीआई से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 4.37 लाख का इस्टीमेट मिला था जिसके बाद उन्होंने आर्थिक मदद के लिए पीएम के संसदीय कार्यालय का रूख किया।

उन्होंने बताया कि उनकी गुहार के बाद पीएमओ ने फरवरी में ही अस्पताल के खाते में 2.17 लाख रुपये जमा करा दिए लेकिन अस्पताल के डॉक्टर यह कहते हुए लगातार तारीख बढ़ाते गए कि उनके पास ऐसे मरीजों की लम्बी फेहरिस्त है। रीता ने बताया, 'इसके बाद मैंने वाराणसी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मुलाकात की, उन्होंने इस मामले में पीजीआई के डायरेक्टर से बात की लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।

उन्होंने बताया कि पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. राकेश कपूर हमें लगातार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पीजीआई के डॉक्टरों के सुपरविजन में ईलाज करवाने की सलाह देते रहे लेकिन हमने इंतजार करना ही बेहतर समझा।'

पीजीआई डायरेक्टर ने दी सफाई

Santosh Kumar, who got PMO funds for kidney transplant, dies on waitlist
बुधवार को जब संतोष की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो हम उसे बीएचयू अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रीता ने भाई की मौत के लिए राजनेताओं और पीजीआई प्रशासन को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर इन लोगों ने जरा सी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो संतोष की जान बच जाती।

वहीं इस मामले में राकेश कुमार ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उनकी 20 दिन पहले बात हुई थी। मैंने उन्हें बताया कि  किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए आठ महीनों की वेटिंग लिस्ट है। यह लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध है जिसमें किसी तरह के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed