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जानिए, कैसे काम करती है 'संत' रामपाल की सेना?

Wed, 19 Nov 2014 04:55 PM IST
Updated Wed, 19 Nov 2014 04:55 PM IST
sant rampal army

बरवाला का स्वयंभू संत रामपाल अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका। पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ के 30 हजार जवानों ने सतलोक आश्रम को घेर रखा है।



मंगलवार को रामपाल की अवैध फौज ने आश्रम की ओर से सुरक्षाबलों पर हमले किए। किसी भी संप्रभु गणतंत्र में निजी सेना रखना अपराध है। रामपाल ने इसके बाद भी अपनी सेना बनाई और सुरक्षाबलों के खिलाफ उन्हें इस्तेमाल किया।


पढ़िए रामपाल की अवैध सेना का कैसा है ढांचा-

1- रामपाल की सेना का नाम राष्ट्रीय समाज सेवा समिति यानी आरएसएसएस है।

2- रामपाल के समर्थक इन्हें सेवादारों को समूह कहते हैं। हालांकि ये किसी मुल्क की सेना की तरह बटालियन, कपंनियों और प्लाटूनों में बंटा है।

सेना में एनएसजी के रिटायर्ड कमांडो भी

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3- हर कंपनी और प्लाटून का नेतृत्व प्रशिक्षित कमांडर करते हैं। माना जा रहा है कि ये कमांडर सेना और पुलिस के रिटायर्ड जवान हैं। रामपाल की सेना में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के रिटायर्ड कमांडो के शामिल होने के आशंका भी है।

4- पिछले कई दिनों से रामपाल के सैनिक रोजाना सुबह और शाम इकट्ठा हो रहे थे। वे दिन की योजनाएं बनाते और आगे की रणनीति पर चर्चा करते।

5- आरएसएसएस की टीम पिस्तौल और अन्य हथियारों से लैस होकर दिन-रात आश्रम के चारो ओर गश्त करती रहती है।

6- सुरक्षा बल ने रामपाल के सतलोक आश्रम को 12 दिनों तक घेरे कर रखा। उसके सरेंडर न करने के कारण मंगलवार को कार्रवाई की। इस दौरान रामपाल की सेना का खुफिया दस्ता आश्रम के नजदीक के शहरों बरवाला और हिसार से पुलिस की मूवमेंट पर नजर रख रहा था।

बरवाला आश्रम में बना है वॉर-रूम

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7- आश्रम में सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए तेजाब की बोतलें, बम, पेट्रोल बम और खाली कांच बोतले रखी गई हैं।

8- रामपाल की सेना में पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के निवासी शामिल हैं।

9- ये जवान काले रंग के कपड़े पहनते हैं, बढि़या क्वालिटी की पिस्तोलों से लैस रहते हैं।

10- एक दूसरे से संपर्क के लिए ये जवान वाकीटॉकी का इस्तेमाल करते हैं।

11- रामपाल के सैनिकों को आश्रम में बनें एक वॉर-रूम से नियंत्रित किया जाता है।

12- बरवाला में रामपाल ने अपनी सुरक्षा के ‌लिए आम लोगों को ढाल बनाकर इस्तेमाल किया।आश्रम की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा घेरा बनाया गया, जिसमें सबसे आगे महिलाओं को रखा गया, बाद में बुजुर्गों को और सबसे पीछे युवाओं को।

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