केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा होगी संस्कृत
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केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा को हटाने और संस्कृत को लाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि छठी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में संस्कृत तीसरी भाषा होगी।
प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन को हटाकर संस्कृत भाषा को शामिल किए जाने के विवाद पर हलफनामा दायर करने की अनुमति मांगी, जिसके लिए पीठ ने उन्हें अनुमति दे दी है।
केंद्र सरकार के निर्णय का असर सभी 500 केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा छठी से आठवीं के 70,000 से भी ज्यादा छात्रों पर पड़ेगा। जिन्हें फैसले के बाद जर्मन की बजाय संस्कृत पढ़नी होगी। जर्मन को अतिरिक्त विषय के तौर पर रखा गया है।
छठी से आठवीं के पाठ्यक्रम में होगी शामिल
सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि भाषा का चयन करने संबंधी फैसला छात्रों और अभिभावकों पर छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को विशेषकर शैक्षिक सत्र के बीच अपना निर्णय छात्रों पर नहीं थोपना चाहिए।
कहा गया कि सरकार को प्रभावित छात्रों और अभिभावकों से बातचीत किए बिना ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए। दलील दी गई कि यह छात्रों के हित में सोचे बिना जल्दबाजी और हड़बड़ी में लिया गया फैसला है।
ये है मामला
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में 27 अक्तूबर को केंद्रीय विद्यालय संगठन के संचालन मंडल (केवीएस) की बैठक हुई थी। इस बैठक में जर्मन भाषा की पढ़ाई पर रोक लगाने और संस्कृत को इसके विकल्प के तौर पर रखने का निर्णय लिया गया था। इसके खिलाफ अभिभावकों के एक समूह ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।