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‘खलनायक’ का कड़वा सच गया मुन्नाभाई के खिलाफ

Thu, 21 Mar 2013 11:42 PM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली Updated Thu, 21 Mar 2013 11:42 PM IST
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sanjay dutt sent back to jail

कहते हैं सच कड़वा होता है, लेकिन इतना कड़वा होगा शायद मुन्नाभाई को भी पता नहीं था।

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खलनायक होने का उनका कबूलनामा कानून की किताबों में उन्हें माफी नहीं दिला पाया।

बॉलीवुड अभिनेता को पांच साल की सजा सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संजय दत्त ने अपने इकबालिया बयान से सिर्फ खुद को ही दोषी साबित नहीं किया, बल्कि अपने मित्र यूसुफ मोहसिन नलवाला को भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

जस्टिस पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने संजय दत्त के इकबालिया बयान को उनके गुनाह के लिए काफी माना है।

पीठ ने टाडा अदालत के फैसले को जारी रखते हुए कहा है कि संजय ने मुंबई पुलिस को 26 और 28 अप्रैल, 1993 को जो बयान दिया था, वह टाडा के तहत स्वीकार्य है।

अदालत ने साफ किया है कि सामान्य कानून में पुलिस के समक्ष दिए गए आरोपी के बयान को कानूनी रूप से अदालत स्वीकार नहीं करती। मगर टाडा के तहत वह स्वीकार योग्य होता है।
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डीसीपी कृष्ण लाल बिश्नोई को दिए बयान की पीठ ने गहनता से जांच-परख की और पाया कि संजय का इकबालिया बयान उन्हें दोषी साबित करने के काफी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संजय दत्त को टाडा के तहत नहीं बल्कि आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा तीन के तहत दोषी करार दिया गया है।

मगर टाडा के तहत कबूल किया गया अपराध आर्म्स एक्ट के तहत दोष साबित होने पर कानूनन स्वीकार्य है। इसके समर्थन में और किसी साक्ष्य की जरूरत नहीं है।

दुबई में हुई दाउद से मुलाकात
संजय दत्त ने अपने कबूलनामे में बताया था कि दिसंबर 1991 में दुबई में फिल्म यलगार की शूटिंग के दौरान फिरोज खान ने उन्हें दाउद इब्राहिम और उसके भाई अनीस से मिलवाया था।
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बाद में मैगनम वीडियो के मालिक हनीफ कांडवाला ने उन्हें कहा कि अगर उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक राइफल की जरूरत है, तो वह तुरंत इसका इंतजाम कर सकता है। संजय के मुताबिक दबाव में आकर उन्होंने इसके लिए हां कर दी।

हनीफ और अबू सलेम ने मुहैया कराई राइफल
संजय दत्त के मुताबिक 16 जनवरी, 1993 को हनीफ और समीर अबू सलेम एक अन्य आदमी के साथ तीन राइफल लेकर उनके घर पहुंच गए।

उन्होंने कहा, ‘मैंने कहा कि मुझे सिर्फ एक राइफल चाहिए। मगर उन्होंने यह कहकर तीनों राइफल दे दी कि अगर आपको जरूरत नहीं होगी तो बाद में ले जाएंगे। राइफल के साथ मैगजीन और राउंड भी थे।

उन्होंने मुझे भूरे रंग के हैंड ग्रेनेड भी दिखाये। मैं घबरा गया था। मैंने तीनों राइफल और असलाह अपनी फिएट कार की डिग्गी में रख दिए। रात में मैं उसे बंगले की दूसरी मंजिल में स्थित कमरे में ले गया।’

पिता के सामने आरोप से किया इंकार
संजय दत्त को मॉरीशस में शूटिंग के दौरान हनीफ और उनके पार्टनर समीर की गिरफ्तारी का पता चला। अपने बयान में संजय ने बताया, ‘मैं काफी डरा हुआ था, सोचा कि पुलिस को सब बता दूं।

मगर डर था कि कहीं मैं भी न फंस जाऊं। मैंने यूसुफ को फोन पर बताया कि राइफल मेरे घर की दूसरी मंजिल के कमरे में एक काले बैग में रखी है, उसे तुरंत नष्ट कर दो। मगर तब तक मेरे पास एके-56 राइफल होने की खबर फैल चुकी थी।

हालांकि मैंने अपने पिता सुनील दत्त के सामने सभी आरोपों से इंकार कर दिया। मेरे पिता ने फ्लाइट का समय पुलिस को बता दिया। मुंबई हवाई अड्डे पर उतरते ही पुलिस ने मुझे पकड़ लिया।’

नायक से खलनायक तक
19 अप्रैल, 1993 : मुंबई क्राइम ब्रांच ने एके-56 और 9एमएम पिस्टल रखने के आरोप में एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।
28 अप्रैल, 1993 : संजय दत्त ने पुलिस के सामने जुर्म कुबूला।
5 मई, 1993 : बांबे हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी।
4 नवंबर, 1993 : संजय दत्त के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल।
4 जुलाई, 1994 : संजय दत्त की जमानत अर्जी खारिज।
20 नवंबर, 1994: संजय अपने बयान से मुकरे।
22 जुलाई, 1995: कोर्ट ने संजय को मॉडल रिया पिल्लई से मिलने की इजाजत दी, जिससे उन्होंने बाद में शादी कर ली।
11 सितंबर, 1995: ट्रायल कोर्ट द्वारा संजय की जमानत अर्जी नामंजूर।
16 अक्तूबर, 1995: सुप्रीम कोर्ट ने संजय के पत्र को याचिका मानते हुए दी जमानत।
18 अक्तूबर, 1995: 15 महीनों के बाद संजय जेल से रिहा।
28 नवंबर, 2006: संजय को टाडा कोर्ट ने 1993 के धमाके में साजिश रचने के आरोप से बरी किया, मगर आर्म्स एक्ट के तहत एके-56 रायफल और 9एमएम पिस्टल रखने का दोषी माना। उन्हें आत्मसमर्पण के लिए 19 दिसंबर तक का समय दिया गया।

18 दिसंबर, 2006: संजय ने प्रोबेशन पर रिलीज करने के लिए कोर्ट में दायर की याचिका।
19 दिसंबर, 2006: संजय को मिला 21 दिसंबर तक आत्मसमर्पण के लिए समय।
21 दिसंबर, 2006: समपर्ण की अवधि बढ़कर 18 जनवरी हुई।
18 जनवरी, 2006: कोर्ट ने संजय की याचिका पर की सुनवाई।
31 जुलाई, 2007: संजय दत्त को छह साल की जेल और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई।
2 अगस्त, 2007: संजय को मुबई में आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवदा जेल लाया गया।
7 अगस्त, 2007: संजय ने सजा के खिलाफ अपील की।
20 अगस्त, 2007: सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को दी अंतरिम जमानत। यरवदा जेल को निर्णय की प्रति सौंपी गई।
23 अगस्त, 2007: संजय से जेल से रिहा।
22 अक्तूबर, 2007: संजय फिर जेल पहुंचे, उन्होंने जमानत के लिए दी अर्जी।
27 नवंबर, 2007: संजय को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत।
जनवरी, 2009: संजय ने सपा के टिकट से लोकसभा चुनाव, 2009 लड़ने की घोषणा की, मगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी दोषसिद्धि को निलंबित किए जाने की नामंजूर किए जाने पर उन्होंने मार्च, 2009 में अपनी उम्मीदवारी को वापस लिया। हालांकि, पार्टी ने उन्हें अपना महासचिव बनाया।
दिसंबर, 2010: विवादों के बाद संजय ने सपा महासचिव का अपना पद छोड़ा।

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