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अंडा सेल में संजय का हुआ बुरा हाल, पढ़ी हनुमान चालीसा
मुंबई/इंटरनेट ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2013 01:46 PM IST
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1993 के मुंबई ब्लास्ट से जुड़े मामले में दोषी करार अभिनेता संजय दत्त को आर्थर रोड जेल की कड़ी सुरक्षा वाली अंडा सेल में रखा गया है।
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इसी सेल में मुंबई हमले के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को रखा गया था। बृहस्पतिवार को टाडा कोर्ट में समर्पण के बाद जेल की इस सेल में संजय की पहली रात भारी बेचैनी और घुटन में कटी।
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वह सो भी नहीं सके। परेशान संजय ने अब टाडा अदालत से उन्हें दूसरी सेल में शिफ्ट करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वह कोई आतंकी नहीं हैं, जो उन्हें सेल में डाल दिया गया है।
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संजय दत्त के वकील रिजवान मर्चेंट ने शुक्रवार को टाडा कोर्ट में मौखिक अपील की कि अभिनेता को अंडा सेल की बजाय जेल की किसी और सेल में रखा जाए।
अंडा सेल में हवा और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे अभिनेता को वहां भारी घुटन महसूस हुई। मर्चेंट ने कहा कि अंडा सेल में आम तौर पर आतंकियों और खूंखार अपराधियों को रखा जाता है।
सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें दूसरे कैदियों से अलग रखा जाता है। अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि संजय को टाडा कानून के तहत दोषी नहीं पाया गया है, उन्हें शस्त्र अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई है। वह आतंकी नहीं हैं। ऐसे में उन्हें अंडा सेल में नहीं रखा जाना चाहिए।
इस पर टाडा जज जीए सनप ने अधिवक्ता को लिखित आवेदन दाखिल करने को कहा है। ताकि वह इस पर अभियोजन पक्ष का रुख जानने के बाद कोई आदेश जारी कर सकें। संजय दत्त को अभी साढ़े तीन साल की सजा काटनी है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने अभी यह फैसला नहीं किया है, उन्हें आर्थर रोड जेल में ही रखा जाए या किसी और जेल में शिफ्ट किया जाए।
लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें पुणे की यरवदा जेल भेजा जाएगा।
हनुमान चालीसा पढ़ा, एक्सरसाइज की
जेल अधिकारियों के मुताबिक संजय दत्त को बृहस्पतिवार को घर का बना खाना उपलब्ध कराया गया और रात में पीने के लिए पानी की बोतल भी दी गई। उन्होंने रात में धार्मिक पुस्तकें पढ़ीं। संजय अपने साथ हनुमान चालीसा, गीता और रामायण जेल ले गए हैं। उन्होंने शुक्रवार सुबह एक्सरसाइज की। हालांकि वह बेचैन दिखे।
जेल में करना होगा काम
संजय दत्त को जेल में काम भी करना होगा। सूत्रों के मुताबिक उन्हें कारपेंटर, बुनकर, खेती या बेकरी में कोई काम चुनना होगा। पिछली बार जब संजय 18 महीने पुणे की यरवदा जेल में रहे थे, तब उन्होंने कुर्सियां बनाने का काम किया था।