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इस मुद्दे पर संघ ने की तैयारी, कोर्ट में लड़ेगा 'जंग'

Sun, 10 May 2015 02:28 PM IST
Updated Sun, 10 May 2015 02:28 PM IST
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sangh will fight for jammu in court

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन की मजबूरी में भाजपा ने बेशक धारा 370 और अपने मुद्दों पर नरमी दिखाई है। लेकिन भगवा परिवार धारा 370 और भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखे धर्मनिरपेक्ष शब्द को राज्य में स्वीकृति न मिलने सरीखे कानूनी नजरअंदाजियों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगा।

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संघ परिवार के संगठनों ने इन मामलों की पुख्ता तैयारी शुरू कर दी है। संघ से जुड़ा जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के समक्ष जल्द ही एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर सकता है। संघ का मानना है कि धारा 370 महज धर्मनिरपेक्ष और गैर धर्मनिरपेक्ष दलों के बीच सियासत की औजार बनकर रह गई है।
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संघ विचारों से प्रेरित जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र बीते कई सालों से सूबे की विवादास्पद संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर रहा है। केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर को एक समस्या के तौर पर पेश किया जाता रहा है, जबकि वह कोई समस्या है ही नहीं। केंद्र और राज्य की सरकारों ने संविधान की आड़ में क्षुद्र लाभ के लिए उसे समस्या बना दिया है।
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मनमाने ढंग से 370 की व्याख्या

sangh will fight for jammu in court

भटनागर के अनुसार 370 की धारा 35-ए की व्याख्या मनमाने ढंग से की जाती रही है। संविधान में कहीं भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे यह तय होता है कि देश के अन्य लोग कश्मीर में संपत्ति खरीद नहीं सकते, रह नहीं सकते और न ही वोट दे सकते हैं। लेकिन फिर भी इसे समस्या के तौर पर पेश किया जाता है।

इसी तरह 42वां संविधान संशोधन, जिसमें संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता शब्द इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में जोड़ा गया था। जम्मू-कश्मीर में स्वीकृत नहीं किया गया। वहां वह परिशिष्ट में है।

इन सभी पहलूओं को लेकर संविधान और कानून के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले में सवोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के समक्ष पीआईएल दायर किया जाएगा। क्योंकि यह संवैधानिक मामला है।

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