धर्मांतरण को लेकर ये है संघ का फाइनल 'एजेंडा'
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आगरा में बिछड़ों की घर वापसी अभियान के जरिये धर्मांतरण की कोशिश पर विवाद के बावजूद संघ अपने तेवर नरम नहीं करेगा। हालांकि थोड़े वक्त के लिए वह इस पर धीमे चल सकता है।
बताया जा रहा है कि आगरा विवाद ने अभियान का जायका बेशक बिगाड़ा है। लेकिन संघ नेतृत्व के हौसले बुलंद हैं। उसे इस बात का विश्वास है कि आने वाले दिनों में विवाद अपने आप थम जाएगा।
संघ के शीर्ष अधिकारियों ने सरकार के नेताओं से भी कहा है कि घर वापसी अभियान के मामले पर बैकफुट पर जाने की जरूरत नहीं है। संघ सूत्रों के अनुसार देश भर में लाखों लोग घर वापसी को तैयार हैं। इन सबकी एक-एक कर फिर से हिंदू धर्म में वापसी कराई जाएगी।
धर्मांतरण विरोधी बिल पर है नजर
बताया जा रहा है कि धर्मांतरण के बहस को बढ़ावा देकर संघ परिवार का मकसद धर्म परिवर्तन रोकने के लिए धर्मांतरण विरोधी विधेयक के लिए जमीन बनाना है। शायद यही वजह है कि इस मामले पर संघ और सरकार के नेताओं की सोच एक जैसी है।
लोकसभा में आगरा मुद्दे पर हुई चर्चा का जवाब देने के दौरान संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने धर्मांतरण रोकने के लिए कानून पर विपक्ष को हामी भरने की चुनौती दे इसे जाहिर भी कर दिया। भगवा परिवार धर्मांतरण के विषय को देश के इतिहास से जोड़कर विरोधियों के खिलाफ ढाल बनाने की तैयारी में है।
वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर सियासत साधने का भी दांव चला जा रहा है। सत्ता पक्ष और विरोधी दलों दोनों को ही यह मुद्दा अपने-अपने फायदे का दिख रहा है। भाजपा रणनीतिकारों को लगता है कि इससे पार्टी का वोट मजबूत होगा। तो सेक्यूलर पक्ष की राजनीति करने वाले दल अपने वोट का फायदा देख रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने के पहले सप्ताह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में धर्म-जागरण मंच से जुड़े करीब डेढ़ हजार नेताओं के साथ नागपुर में तीन दिवसीय बैठक कर उन्हें घर वापसी अभियान को तेज करने का आह्वान किया था।