अयोध्या मामले को फिर से धार देने में जुटा संघ
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक बार फिर से अयोध्या के राम मंदिर मुद्दे को धार देने में जुट गया है। नए अभियान के तहत संघ पुरातात्विक तथ्यों के जरिए राम मंदिर पर अपने पक्ष को देश-दुनिया के सामने रखेगा।
अपने मकसद को परवान चढ़ाने के लिए संघ ने मामले को लेकर देशभर में जनजागरण की रणनीति बनाई है। इस कवायद में पहला कदम बढ़ाते हुए संघ के संगठन अखिल भारतीय इतिहास संकलन ने देश की राजधानी दिल्ली में 25 जुलाई को अयोध्या-विवाद का यथार्थ पर परिचर्चा का आयोजन रखा है।
आयोजन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डा. बी.आर मणि को आमंत्रित किया गया है। बताया जा रहा है कि इन्हीं की देखरेख में भारतीय पुरातत्व विभाग के जरिए अयोध्या में खुदाई हुई और उसकी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी गई। न्यायालय में रिपोर्ट होने के कारण जनता के बीच बात सही ढंग से नहीं आ पाई है। (फाईल फोटो)
परिचर्चाएं होंगी आयोजित
हालांकि संघ के एक शीर्ष अधिकारी का आरोप है कि यूपीए सरकार ने जान बूझ कर
रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं होने दिया। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को औजार
बनाते हुए संघ के संगठन देशभर के अलग-अलग शहरों में इस मामले को लेकर
परिचर्चा आयोजित करेंगे।
संघ से जुड़े भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति के
महासचिव अरुण पांडे ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अयोध्या के
पुरातात्विक सच्चाईयों को लेकर संस्थान जनजागरण अभियान चलाएगा।
वैसे संघ
की इस रणनीति को मोदी सरकार पर राम मंदिर के लिए दबाव बनाने की रणनीति का
हिस्सा माना जा रहा है।भाजपा नेता विनय कटियार पहले ही सरकार से राम मंदिर
मामले पर संयुक्त सत्र के जरिए संसद से बिल पारित कराने की मांग कर चुके
हैं।
900 पन्नों की है रिपोर्ट
विहिप नेता सुरेंद्र जैन कह चुके हैं कि हमें इस सरकार पर अभी संदेह
नहीं है।बताया जा रहा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जरिए न्यायालय
को सौंपी गई रिपोर्ट लगभग 900 पन्नों की है।
संघ के पक्षकारों का दावा है
कि खुदाई के तहत मिले प्रमाणों से संघ परिवार के पक्ष को मजबूती मिलती है।
रिपोर्ट में मंदिर सरीखे दसवीं सदी में बने ढांचे की बात कही गई है। इसमें
तमाम ऐसे साक्ष्यों का विवरण है जिससे राम मंदिर का प्रमाण मिलता है।