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संघ की पहली परीक्षा में मोदी सरकार पास

Mon, 16 Mar 2015 12:28 PM IST
Updated Mon, 16 Mar 2015 12:28 PM IST
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Sangh supports with Modi government.

तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा के समापन संबोधन में संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने अपने सभी संगठनों से कहा है कि सभी संगठन मर्यादा में रहकर और शब्दों की गरिमा का ध्यान रखते हुए अपना काम करें।

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भागवत के इस बयान को भगवा परिवार के उन नेताओं के लिए नसीहत माना जा रहा है, जिनके गलत बयानबाजियों के कारण संघ का न सिर्फ घर वापसी अभियान विवादों में पड़ा था बल्कि मोदी सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा था।
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संघ ने मोदी सरकार के कामकाज पर भी अपनी मुहर लगा दी है। बताया जा रहा है कि अपने विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रयास में खुद पीएम मोदी ने भी संघ का साथ मांगा था।
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मोदी सरकार के दस माह के कामकाज पर संघ की मुहर लगाते हुए सरकार्यवाह भैय्या जोशी ने कहा है कि सरकार का कामकाज संतोषजनक है। आकांक्षाओं पर खरा न उतरने के आरोप को खारिज करते हुए जोशी ने कहा है कि नौ महीने में जनता की सारी आकांक्षाएं पूरी नहीं हो सकती हैं।

संघ ने पदाधिकारियों के नाम का किया ऐलान

Sangh supports with Modi government.

संघ ने अपने भारतीय पदाधिकारियों की घोषणा भी कर दी है। सह सरकार्यवाह के पद पर दत्तात्रेय होसबोले, सुरेश सोनी और कृष्ण गोपाल को बरकरार रखते हुए वी भागय्या को भी सह सरकार्यवाह बनाया गया है।

शांतु रंजन को अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख, मुकुंद सीआर को सह बौद्धिक प्रमुख, सुनील कुलकर्णी को अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख, जगदीश प्रसाद को सह शारीरिक प्रमुख, अनिरुद्ध देशपांडे को संपर्क प्रमुख, अरुण कुमार और सुनील देशपांडे को सह संपर्क प्रमुख, सुहास हीरामत को सेवा प्रमुख, अजीत महापात्रा, गुनवंत कोठारी को सह सेवा प्रमुख, मंगेश भेंडे को व्यवस्था प्रमुख और अनिल ओक को सह व्यवस्था प्रमुख बनाया गया है।

साथ ही मनमोहन वैद्य प्रचार प्रमुख, जे नंद कुमार सह प्रचार प्रमुख, सुरेश चंद्रा प्रचारक प्रमुख, विनोद कुमार और अद्वैत चरण दत्ता सह प्रचारक प्रमुख बनाए गए हैं जबकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इंद्रेश कुमार, मधु भाई कुलकर्णी, शंकर लाल, डा. दिनेश कुमार, मुकुंद राव पानशिकर, सकल चंद्र बगरेचा, हस्तीमल, सुनील पद गोस्वामी, महावीर और अशोक भेरी को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। वहीं मदन दास देवी, बालकृष्ण त्रिपाठी और सेतु माधवन को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय संघ चालक भी आमंत्रित सदस्य होंगे।

कार्यकारिणी की बैठक से पहले समन्वय समिति की बैठक

Sangh supports with Modi government.

करीब डेढ़ साल बाद कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में 3 और 4 अप्रैल को हो रही भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले भाजपा-संघ समन्वय समिति की बैठक होगी।

इस बैठक में दो दिवसीय कार्यकारिणी की बैठक की रूपरेखा तय की जाएगी। कार्यकारिणी की बैठक में संघ के प्रतिनिधि के रूप में सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले शिरकत करेंगे।

उल्लेखनीय है कि समन्वय समिति की बैठक में दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों, बिहार में भावी विधानसभा चुनाव और जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार गठन के बाद उपजे विवादों पर प्रारंभिक विचार विमर्श के आसार हैं।

इन सभी मुद्दों पर कार्यकारिणी की बैठक में न केवल विस्तार से चर्चा होगी, बल्कि विस्तृत और दीर्घकालिक रणनीति भी तैयार की जाएगी। समन्वय समिति की बैठक 22 मार्च के बाद कभी भी बुलाई जा सकती है। इस बैठक से पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संगठन में खाली पड़े पदों के लिए नामों की घोषणा करेंगे।

भाजपा में भी कार्यकारिणी की बैठक के एजेंडे पर शुरुआती मंथन शुरू हो गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक कार्यकारिणी में कर्नाटक में फिर से खोया आधार वापस हासिल करने, बिहार विधानसभा चुनाव पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही विस्तार वाले राज्यों में भी अब तक की तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही भविष्य की योजना तैयार की जाएगी।

संतुलन साधने में जुटा संघ
संघ का पूरा जोर फिलहाल भाजपा से बेहतर संतुलन साधने का है। यही कारण है कि संघ ने तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए भैयाजी जोशी की बतौर सरकार्यवाह तीसरी पारी पर मुहर लगा दी।

इससे पहले चर्चा थी कि संघ जोशी की जगह पीएम मोदी के पसंद सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की पदोन्नति करेंगे।

संघ ने नहीं छोड़ा राम मंदिर का मुद्दा

Sangh supports with Modi government.

भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि उसने राम मंदिर का मुद्दा नहीं छोड़ा है। उसने इस मुद्दे के प्रति अपनी गंभीरता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चल रहे राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने की अपील की है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष निर्णायक  निकाय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के आखिरी दिन संघ के महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि उनके संगठन ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता नहीं छोड़ी है।

उन्होंने कहा कि हमने राम मंदिर का मुद्दा कभी नहीं छोड़ा है। हाईकोर्ट ने राम मंदिर के मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला किया था लेकिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। न्यायपालिका अहम है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की कार्यवाही धीमी चल रही है। इसे तेज करने की जरूरत है।

भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ को नहीं लगता कि इस मुद्दे पर अभी कोई आंदोलन छेड़ने की जरूरत है। हम यह बाद में तय करेंगे कि इस पर क्या किया जाना है। लेकिन इतना तय है कि हमने यह मुद्दा छोड़ा नहीं है।

भैया जी जोशी को तीसरी बार संघ का सरकार्यवाह चुना गया है। आखिरी दिन अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जोशी ने पाकिस्तान से भारत भाग कर आए हिंदुओं को नागरिकता का सवाल भी उठाया।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को तुरंत भारत की नागरिकता मिलनी चाहिए। अगर विदेशी धरती पर अन्याय का सामना कर रहे हिंदू भाग कर भारत आते हैं तो यह हमारे समाज और देश की जिम्मेदारी है कि उन्हें यहां स्वीकार करें।

जोशी ने कहा कि संघ गौ वंश के रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सिर्फ भाजपा शासित कुछ राज्यों की ओर से गायों के वध पर रोक लगा देने से यह काम नहीं होने वाला। सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गोवध के खिलाफ बने कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए करें।

जोशी ने जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के बीच रिश्तों के तनाव से जुड़े किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में नन से बलात्कार की कड़ी आलोचना की लेकिन यह भी कहा कि कुछ लोग ऐसे मामलों का इस्तेमाल दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए करते हैं।

संघ के दूसरे सहयोगी संगठनों मसलन स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ की ओर से सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून की आलोचना के बारे में किए गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने इसमें कई संशोधन किए हैं और अब इसके खिलाफ बोलने का कोई औचित्य नहीं है।

एफडीआई और मेक इन इंडिया का जागरण मंच की ओर से विरोध पर उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे मुद्दे उभरते रहते हैं और उनका समाधान भी हो जाता है। मोदी सरकार नतीजे देने और वादा निभाने वाली सरकार है।

‘परंपरा और संस्कृति से भटकाती है विदेशी भाषा में शिक्षा’

Sangh supports with Modi government.

संघ ने केंद्र सरकार और राज्यों की भाजपा सरकारों से विद्यार्थियों की मातृभाषा या संविधान को ओर से मान्य राज्य की भाषाओं में शिक्षा देने की व्यवस्था करने को कहा है।

संघ का कहना है कि जो लोग विदेशी भाषा में शिक्षा हासिल करते हैं वे अपनी संस्कृति और परंपराओं से भटक जाते हैं। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने अपनी बैठक के तीसरे दिन मातृभाषा और राज्यों की भाषाओं में शिक्षा देने से जुड़ा एक प्रस्ताव पारित किया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि विदेशी भाषा में शिक्षा हासिल करने वाला विद्यार्थी अपने आसपास के माहौल, परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों से भटक जाते हैं और इस दौरान वह अपनी पहचान भी खो बैठते हैं।

आदिवासियों का जीवन स्तर सुधार रहा है संघ: जोशी
धर्म परिवर्तन पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे कुछ सहयोगी संगठनों की ओर से आंदोलन चलाने के मुद्दे पर संघ ने अपना नजरिया स्पष्ट किया है।

संघ ने कहा है कि आदिवासियों के बीच काम कर रहे उसके कार्यकर्ताओं का प्रमुख उद्देश्य उनके बीच जागरूकता पैदा करना और उनका जीवन स्तर सुधारना है। वे अपनी सेवा के जरिये आदिवासियों का जीवनस्तर सुधारने का काम कर रहे हैं।

संघ के महासचिव भैया जी जोशी ने यह बयान आदिवासियों के बीच ईसाई मिशनरियों और संघ के कार्यकर्ताओं के बीच काम में अंतर बताते हुए दिया।

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