'विकास के एजेंडे को पटरी से उतार रहा RSS'
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जाने-माने उद्योगपति राहुल बजाज का कहना है कि नरेंद्र मोदी की सरकार देश की तरक्की और आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए सही रास्ते पर काम कर रही है, लेकिन संघ परिवार के लोग धर्मांतरण, गोडसे मंदिर और घर वापसी जैसे बेतुके मामले उठाकर विकास के एजेंडे को पटरी से उतारने का काम कर रहे हैं।
अमर उजाला के साथ बातचीत में बजाज ने कहा कि वह न तो भाजपा समर्थक हैं और न ही कांग्रेस विरोधी, लेकिन एक गौरवान्वित भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक आजाद व्यक्ति हूं और मेरे स्वतंत्र विचार हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक सही व्यक्ति कहा।
बजाज बोले, "मोदी को विकास के एजेंडे को पटरी से उतार रहे लोगों के खिलाफ सामने आना चाहिए और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्ती से बोलना चाहिए। धर्मांतरण, घर वापसी, गोडसे का मंदिर जैसे मुद्दे उठाना सही नहीं है। मैंने मोदी से इस बारे में संबंधित लोगों से बात करने को कहा है और इन सब को खत्म करने की अपील की है, लेकिन मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को इस बारे में सख्ती से उन्हें अवगत कराना चाहिए।"
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वे बोले, "मैं एक स्वाभिमानी हिंदू हूं और इसे मैं देश और विदेश में गर्व से स्वीकार करता हूं, लेकिन कट्टरता कभी काम नहीं आती।" साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विकास को बढ़ाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है, लेकिन चीजों को अमल में आने में वक्त लगता है।
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सब्सिडी के मसले का हल निकाले सरकार
मोदी सरकार की प्राथमिकता की चर्चा करते हुए बजाज ने कहा कि केंद्र को सब्सिडी के मसले का समाधान निकालना चाहिए। सरकार को गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को मिल रही सब्सिडी में कटौती करनी चाहिए। हालांकि गरीबी की रेखा (बीपीएल) से नीचे जीवनयापन कर रहे लोगों के लिए सब्सिडी बरकरार रखनी चाहिए।
अध्यादेश लाना किसी समस्या का हल नहीं
बजाज ने मोदी सरकार के विभिन्न अहम बिलों पर अध्यादेश लाने के कदम को सही नहीं माना। उनका कहना है कि परिस्थितियां खुद को दोहरा रही हैं। पहले भाजपा इन बिलों को पास नहीं होने दे रही थी और अब कांग्रेस राज्यसभा में समस्या उत्पन्न कर रही है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश राज कोई समाधान नहीं है क्योंकि इससे संदेश जाएगा कि राज्यसभा के अस्तित्व को नजरअंदाज किया जा रहा है।
यह सरकार के लिए कठिन परिस्थिति है। उन्होंने कहा कि माइनिंग, कोल, भूमि अधिग्रहण और अन्य मामलों पर लाए गए अध्यादेश लोकसभा से तो आसानी से पारित हो जाएंगे लेकिन राज्यसभा में फिर दिक्कत आएगी। ऐसे में इन्हें पास कराने के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाना पड़ेगा।