मोदी सरकार से संघ भी परेशान, ये है वजह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को लोकसभा चुनाव में जनता से किए वादे अब भारी पड़ने लगे हैं। विपक्ष के साथ ही अपने सहयोगी संगठनों की ओर से भी सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगने लगे हैं।
पूर्ण बहुमत और कुशल नेतृत्व के बावजूद अहम मामलों पर सरकार के यू-टर्न ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बताया जा रहा है कि वन रैंक वन पेंशन और रक्षा सौदों में बिचौलियों की रोक को लेकर भी सरकार अब पलटी मारने की तैयारी में है।
इससे पहले काले धन, न्यूनतम समर्थन मूल्य, बीमा विधेयक और बांग्लादेश के साथ भूमि समझौते पर उसका बदला रुख सामने आ चुका है।
एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि विपक्ष में रहकर साहस दिखाना अलग बात है और सरकार में आकर उन पर अमल करना अलग मामला है। सरकार को वन रैंक वन पेंशन को लागू कर पाना सहज नहीं दिख रहा है। दिवाली के दिन सियाचिन में जवानों के बीच प्रधानमंत्री ने इसका ऐलान किया था।
भारतीय किसान संघ के निशाने पर सरकार
वहीं सरकार का यह भी मानना है कि बिचौलियों के बिना रक्षा सौदे हो ही नहीं सकते। दूसरे देशों के साथ रक्षा सौदे के लिए बिचौलियों का होना अब सरकार को जरूरी लगने लगा है।
सरकार को एक वर्ष का हनीमून पीरियड देने के बावजूद संघ अपने निर्णय पर पुनर्विचार को मजबूर हो रहा है। जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए संघ नेतृत्व ने तय किया है कि आगामी मार्च में नागपुर में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक में वह सरकार के कामकाज की समीक्षा करेगा।
वहीं संघ के संगठनों ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रभाकर केलकर ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर महज 50 रुपये का इजाफा कर सरकार ने किसानों के साथ किए अपने वादे को तोड़ा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह अपने वादे को पूरा करे या कम से कम 250 की रुपये के बोनस का ऐलान करे। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वादाखिलाफी से बाज नहीं आएगी तो उसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।