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दंगाः दरकते वजूद को बचाने में लगे मुलायम

Sun, 22 Sep 2013 08:31 AM IST
कपिल कुमार/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
कपिल कुमार/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Sun, 22 Sep 2013 08:31 AM IST
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samajwadi party now on defence mode and saving own playing field
दंगे से दरकते वजूद को बचाने के लिए अखिलेश सरकार ने गिरफ्तारी का दांव खेल दिया है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपना दौरा भी ऐन वक्त पर इसीलिए टाला कि कहीं दोषी नेताओं का खुला घूमना पीड़ितों का गुस्सा और न बढ़ा दे।
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नेताजी अपने तजुर्बे का इस्तेमाल कर अल्पसंख्यकों के विश्वास में पड़ी दरार को भरना चाहते हैं। मुजफ्फरनगर के दंगे से सूबे की राजनीति में उबाल है। विधानसभा में भी खूब हंगामा मचा, सरकार आरोपों से घिरी है। सीएम अखिलेश यादव के दौरे में सामने आई नाराजगी से खुद ‘नेताजी’ भी उलझन में हैं।
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सरकार पर सवाल उठे तो मुलायम को कंट्रोल के लिए खुद आगे आना पड़ा। पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आने के बाद सपा ने तय कर लिया कि मुस्लिमों के बीच मुलायम सिंह यादव को जाना होगा।
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प्रोग्राम तय हुआ, लेकिन ऐन वक्त पर टाल दिया गया। इसके पीछे नेताजी का विरोध होने की रिपोर्ट भी कारण थी। मुस्लिम समुदाय के लोग इस बात पर ज्यादा गुस्सा हैं कि दंगे के गुनहगार अभी तक आजाद हैं।

इसके बाद ही सरकार ने तय किया कि दोषियों की गिरफ्तारी हर हाल में हो, क्योंकि आंख-मिचौली के खेल से भी अवाम में गलत मैसेज जाने लगा था। पुलिस की टीमें पहले से गठित थीं, लेकिन सरकार के इशारे की देर थी।


लखनऊ से थानाभवन के बीजेपी विधायक सुरेश राणा और सरधना से संगीत सोम को हिरासत में ले लिया गया। सरकार ने अपनी कार्रवाई में भी बैलेंस करने की कोशिश की है। बसपा सांसद कादिर राना के भाई एवं चरथावल के बसपा एमएलए नूरसलीम राना की गिरफ्तारी भी यही जाहिर कर रही है।

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