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जिन कलेजों में पहुंची है इस फैसले से ठंडक

Wed, 06 May 2015 07:21 PM IST
विनोद वर्मा/संपादक, अमर उजाला डॉट कॉम
विनोद वर्मा/संपादक, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Wed, 06 May 2015 07:21 PM IST
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salman verdict

एक बार फिर साबित हुआ कि असल जिंदगी सुनहरे पर्दे की जिंदगी से अलग होती है। और यह भी कि यह फिल्मी पर्दे का मिथक ही है कि जो पैसे वाला होता है और जिसकी ऊंची पहुंच होती है वह हर बार बच जाता है।

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सलमान खान नहीं बच पाए, उन्हें जेल जाना पड़ेगा।

लापरवाही से गाड़ी चलाने और फिर लोगों को कुचलकर घटनास्थल से भाग जाने के मामले में सलमान खान को अदालत से मिली सजा एक फिल्मी हीरो के लिए एंटी-क्लाइमेक्स की तरह है।
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सलमान एक ऐसे फिल्मी हीरो हैं, जो अपनी लोकप्रियता के आधार पर अपनी बेतुकी फिल्मों को भी सौ करोड़ के आंकड़ों तक ले जाते रहे हैं, लेकिन एक दशक से भी अधिक समय तक चली असल जीवन की एक कथा के अंत में यह हीरो अंतत: हार गया है।
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'बीइंग ह्यूमन' के नाम से स्वयंसेवी संस्था चलाने वाले सलमान के बारे में उनका प्रचार तंत्र बताता रहा है कि वे बेहद रहमदिल इंसान हैं। लेकिन इस मुकदमे ने उन पर चतुराई के साथ लगाई गई इस कलई को भी खोला है।

अदालत में उनके वकीलों ने 'ड्राइवर गाड़ी चला रहा था', 'सलमान ने शराब नहीं पी थी' जैसे झूठ रखे और सलमान उसमें शामिल थे। यह उनकी मानवीयता की सच्चाई बयान करने वाले झूठ हैं।

कुछ निजी ब्लॉग में और सोशल मीडिया में यह कहानी भी पढ़ी जा सकती है कि इस मामले के प्रमुख गवाह रहे मुंबई पुलिस के सिपाही रवींद्र पाटिल के साथ क्या क्या हुआ। बयान बदलने से लेकर प्रताड़ना तक।

कुल मिलाकर तमाम तिकड़मों के बाद भी सलमान जेल की सलाखों के पीछे होंगे। अपनी अकूत संपत्ति, नरेंद्र मोदी का चुनावी प्रचार करने और अन्यान्य तरह की ऊंची पहुंच के बावजूद।

पिछले कुछ बरसों में अदालतों ने संजय दत्त, शाइनी आहूजा और बिंदू दारासिंह जैसे फिल्मी लोगों को भी जेल भेजा है। रामालिंगा राजू, विकास यादव से लेकर मनु शर्मा तक कई लोग जेलों में ही हैं। ए राजा और कनिमोझी जैसे राजनीतिक लोगों को भी सलाखों के पीछे रहना पड़ा है। ये सब भी इसी श्रेणी के अपराधी हैं। भले उनके अपराध अलग रहे हों।

अदालतों के इस तरह के फैसले आम लोगों को आश्वासन देते हैं कि कानून दरअसल अंधा ही है और वह अपराध की सजा तय करते वक्त यह नहीं देखता कि अपराध करने वाला कौन है।

जिस राजनीतिक-सामाजिक परिवेश में हम रह रहे हैं वहां जरूरी है कि आम जनता के पास यह भरोसा रहे कि अपराध की सजा कानून के हिसाब से तय होगी न कि अपराध करने वाले के रसूख से।


तो सलमान के जेल जाने से उनके प्रशंसकों को दुख जरूर पहुंचा होगा लेकिन ऐसे कलेजे भी लाखों होंगे जिनमें ठंडक पहुंची होगी। यह उन रसूखदार लोगों के लिए सबक की तरह हैं जो अपने पैसे और पहुंच के दम पर अपने आपको सर्वशक्तिमान मान बैठे हैं।

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