फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   salman rushdie and family lose legal battle over bungalow in sc

रश्दी और उनका परिवार बंगले की अदालती जंग हारा

Sun, 09 Dec 2012 06:58 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sun, 09 Dec 2012 06:58 PM IST
विज्ञापन
salman rushdie and family lose legal battle over bungalow in sc

प्रसिद्ध लेखक सलमान रश्दी और उनका परिवार अपने पुश्तैनी बंगले को फिर से हासिल करने की तीन दशक से चली आ रही कानूनी लड़ाई हार गया है।

विज्ञापन


लेखक के पिता ने 1970 में  इस बंगले को किसी अन्य परिवार को बेचने पर सहमति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने रश्दी परिवार को इस समझौते का सम्मान करने का निर्देश दिया है। हालांकि शीर्ष कोर्ट ने खरीदार को संपत्ति की मौजूदा मार्केट कीमत का भुगतान करने को कहा है।
विज्ञापन


रश्दी के पिता अनीस अहमद रश्दी ने तत्कालीन कांग्रेस नेता भीकू राम जैन को उत्तरी दिल्ली में पॉश सिविल लाइंस इलाके में स्थित अपना घर 3.75 लाख रुपये में बेचने का करार किया था। जैन ने रश्दी को 50 हजार रुपये भी दिए थे और आश्वासन दिया था कि आयकर विभाग से कर अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद शेष राशि का भी भुगतान कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद दोनों परिवारों के बीच करार का सम्मान नहीं करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। जैन ने 1977 में मामला दाखिल कर ट्रायल कोर्ट से रश्दी को दिसंबर 1970 में किए गए समझौते का सम्मान करने का निर्देश दिए जाने की अपील की। 5 अक्तूबर 1983 को कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि जैन शेष 3.25 लाख रुपये अदा कर संपत्ति हासिल कर सकते हैं।


इस फैसले के खिलाफ रश्दी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की और पिछले साल 31 अक्तूबर निर्णय दिया कि जैन उनसे बंगला सौंपने के लिए नहीं कह सकते हैं। कोर्ट ने रश्दी को 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ 50 हजार रुपये लौटाने को भी कहा। इस फैसले के खिलाफ जैन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शीर्ष कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि रश्दी के पक्ष में फैसला देकर हाई कोर्ट ने गलती की और फैसले को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पी. सदाशिवन और रंजन गोगोई की बेंच ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद हमारा मानना है कि इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत है और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले एवं निष्कर्ष को खारिज किया जाता है। बेंच ने कहा कि हमारा मानना है कि बचाव पक्ष द्वारा वादी के साथ किया गया बिक्री करार वर्तमान मार्केट रेट पर हो।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed