फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   salman must read this facebook post

हिट एंड रन के एक पीड़ित की ये पोस्ट झकझोर देगी आपको

Sat, 09 May 2015 03:58 PM IST
Updated Sat, 09 May 2015 03:58 PM IST
विज्ञापन
salman must read this facebook post

हिट एंड रन केस में सलमान खान को पांच साल की सजा दिए जाने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। सलमान खान के साथ रियायत करने के पक्ष में एक खेमा पुरजोर तरीके से खड़ा रहा तो एक खेमे ने पूछा कि सलमान के साथ आम दोषियों जैसा बर्ताव क्यों नहीं?

विज्ञापन


सलमान ने जिस रात मुंबई में फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचल दिया, उस वारदात से चार साल पहले चारुदत्त आचार्य 28 साल के थे। इस नए उभरते लेखक आचार्य के लिए जैसे हर अवसर बाहें खोले इंतजार कर रहा था। उसकी नई-नई शादी हुई थी और कुछ ही महीनों में उसके घर एक नन्हा मेहमान आने वाला था।
विज्ञापन


सलमान खान को 2002 के हिट एंड रन मामले में बेल मिलने के एक दिन बाद आचार्य, जो कि खुद भी एक हिट एंड रन मामले के पीड़ित हैं, ने एक फेसबुक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए इस हादसे के बारे में लोगों को बताया है। इस पोस्ट को अभी तक 10,000 से भी ज्यादा बार सोशल मीडिया पर शेयर किया जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक हादसा से बदल गई जिंदगी

salman must read this facebook post
आचार्य ने अपनी कहानी सुनाते हुए उस पोस्ट में लिखा, 'मैं खुश था। अक्टूबर की दोपहर में ऑटो से अमेरिकन बेकरी (जहां सलमान खान की घटना हुई) के पास से ही गुजर रहा था। अचानक से तेज रफ्तार में गाड़ी चला कर आ रही एक युवती, जो कि फिल्म जगत के ही किसी नामी व्यक्ति की बेटी थी, मेरे ऑटो से आ भिड़ी और ऑटो बुरी तरह पलट गया।''  

आचार्य ने लिखा है, ''मेरा बांया पैर पूरी तरह घायल हो चुका था। चमत्कार ही कहेंगे कि ऑटो चालक को जरा भी खरोंच नहीं आई थी और उसी ने मुझे ऑटो से बाहर निकाला। वह युवती अपनी दोस्त के साथ गाड़ी से बाहर निकली, पूरे दृश्य देखा और वापस गाड़ी में बैठ कर चली गई।''

आचार्य ने पोस्ट में यह भी लिखा है कि किस तरह वहां खड़े लोगों की भीड़ में से एक अजनबी अपनी गाड़ी रोक कर उसके पास आया, बच्चे की तरह गोद में उठाया और अपनी गाड़ी की पीछे वाली सीट पर बिठा कर पास के अस्पताल में ले गया।  

आचार्य ने लिखा है,'' उसकी गाड़ी खून से लथपथ हो चुकी थी। उसके नंबर मांगने पर मैंने अपने घर का नंबर और अपनी पत्नी का नाम बताया। मैं बेहोश पड़ा था। मैंने उससे पूछा क्या मैं मर जाऊंगा और उसने कहा शायद नहीं।''

अजनबी ने बचाई जान

salman must read this facebook post
उस अजनबी ने आचार्य की पत्नी को फोन कर के सूचित किया और अगले दिन आचार्य के लंबे जटिल ऑपरेशन खत्म होने के बाद अस्‍पताल में उससे मिलने आया। आचार्य से मिलने पर उस व्यक्ति ने बताया कि वह एक जिम इंस्ट्रक्टर है। कुछ ही हफ्ते पहले उसके नेत्रहीन विधुर पिता की इसी तरह एक गाड़ी के नीचे आ जाने से और मदद मिलने में देरी हो जाने से मौत हो गई। वह अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए भारत आया हुआ था और तेरहवीं के बाद घर लौट ही रहा था, जब उसने आचार्य को सड़क पर जख्मी हालत में देखा।

आचार्य ने लिखा है,'' उस व्यक्ति ने कहा कि जब उसने मुझे वहां सड़क पर देखा तो उसे मेरे लिए वहां रुकना ही था।'' इसी बीच ऑटो ड्राइवर ने उस युवती की गाड़ी के नंबर का कुछ हिस्सा लिख लिया था, जिसे पुलिस को तहकीकात करने के लिए दे दिया गया।

ढाई महीने बाद जब पुलिस ने आखिरकार उस गाड़ी और हादसे के लिए जिम्मेदार उस युवती का पता लगा लिया तो वह आचार्य से मिलने उसके घर आई। आचार्य के मुताबिक, उसका कहना था कि वह उस मंजर को देख कर घबरा गई थी और उसे डर था कि वहां मौजूद लोग कहीं उसके साथ कुछ बुरा न कर दें इसलिए वह घटनास्थल से भाग गई।

बैसाखी के सहारे रह गई जिंदगी

salman must read this facebook post
आचार्य ने लिखा है, ''मेरे बार-बार पूछने पर भी कि उसने जा कर पुलिस को इस हादसे और अपनी गलती के बारे में क्यों नहीं बताया, वह आखें झुकाए चुप रही। दो आंसु टपकाए और फूलों का गुलदस्ता दे कर चली गई।''

महीने बीत गए और उस लड़की को सजा नहीं हुई। आचार्य के पास मेडिकल और जीवन बीमा न होने के कारण, कार बीमा कंपनी की तरफ से कुछ मामुली सा मुआवजा दे दिया गया। ''तो यह था पूरा मामला'', आचार्य ने लिखा है।

आगे कुछ सालों में आचार्य के दो-तीन ऑपरेशन और हुए लेकिन उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन से लेकर आज तक वह कभी अपने पैरों के बलबूते सीधा नहीं चल पाया है। आचार्य ने पोस्ट में लिखा है,''मैं बैसाखी के सहारे इस कभी न ठीक होने वाली विकलांगता के साथ जीता हूं।''

हालांकि इस पूरे इलाज के दौरान आचार्य का व्यवसायिक, आर्थिक, भावात्मक और मानसिक तौर पर काफी नुकसान हुआ है लेकिन वह अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझता है कि वह इतनी बड़ी समस्या से जूझ पाया है। 44 साल के हो चुके आचार्य अब टीवी के एक सफल स्क्रिप्ट लेखक हैं।

पैसे के दम पर बच निकलता है दोषी

salman must read this facebook post
आचार्य कहते हैं,'' सड़क पर टक्कर (हिट) कई कारणों से हो सकती हैं जिसमें से खून में शराब की मात्रा बढ़ जाना भी शामिल है लेकिन मौके से भागना (रन) तब होता है जब खून में निर्दयता और घंमड की मात्रा बढ़ जाती है।'' उनका मानना है कि इंसान गलती कर के मौके से तब भागता है जब उसको विश्वास होता है कि वह भ्रष्ट तरीकों से और पैसे के बल पर बच निकलेगा।

सलमान के मामले में टिपण्णी करते हुए आचार्य कहते हैं कि सलमान का पांच लोगों को कुचल डालने के बाद इस तरह भागना कायरता और शर्मनाक है।

उनका खान के सभी समर्थकों से कहना है कि एक बार उन लोगों के बारे में भी सोचें जो अमेरिकन बेकरी पर सामान खरीद रहे थे और फिर सलमान की गाड़ी के शिकार हो गए, जो खुद इतनी आसानी से वहां से निकल लिए। आचार्य ने लिखा है,'' सलमान 13 साल तक भागते रहे। पहले तो घटनास्थल से और फिर पैसे के दम पर कानून से''।

पीड़ितों का दर्द भी समझने की है जरूरत

salman must read this facebook post
हालांकि सलमान की बेल से कोई एतराज न जताते हुए आचार्य का कहना है कि उन्हें लगा कि यह जरूरी है कि लोगों को बताया जाए कि किस तरह कोर्ट का एक फैसला भी पीड़ित के जीवन में कुछ सुधार नहीं ला पाता। ''मैं चाहता हूं कि लोग पीड़ितों के प्रति संवेदनशील बनें। पीड़ित को किस तरह मदद दी जानी है यह उन अमीरों की मर्जी से तय नहीं होना चाहिए।''

सलमान खान ने इस मामले में बार बार पीड़ितों को मुहावजा देने की इच्छा जहिर की है। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जब्कि एक का पैर कट गया था।

हिट एंड रन में बच जाने वाले की हादसे की बाद की जिंदगी को बयां करते हुए आचार्य ने कहा है कि कई बार आप सोते-सोते डर कर उठ जाते हैं। आपका दिल किस कदर रोता है जब आप अपने बच्चों के साथ फुटबॉल नहीं खेल पाते, और फिर आप उस कोर्ट की सुनवाई के लिए चक्कर लगाते रहते हैं जहां दरियादिल इंसान खान कहते हैं कि वह तो गाड़ी चला ही नहीं रहे थे। वह तो आपको पहचानते भी नहीं और शायद कई बार अपना फैन समझ कर हाथ हिला कर चले जाते हैं।

आचार्य ने लिखा ''पांच साल बाद भी पीड़ित बस की 'विकलांग' सीट पर, हॉस्पिटल के प्रतीक्षालय में, डांस पार्टी में, समुद्र के किनारे बस बैठा रह जाएगा और आप(दोषी) पूरी जिंदगी आराम से बिता देंगे। तो फर्क पहचानिए।''
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed