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तो 1 सिगरेट के लिए देने होंगे 100 रुपए!

Wed, 26 Nov 2014 12:53 PM IST
Updated Wed, 26 Nov 2014 12:53 PM IST
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Sale of Loose Cigarettes Will be Banned

केंद्र सरकार ने खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है। यानी अगर आपको एक सिगरेट पीनी है, तो भी आपको पूरा पैकेट ही खरीदना होगा।

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यही नहीं सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करने पर आपको 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसके अलावा युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने के लिए सरकार तंबाकू उत्पाद खरीदने के लिए न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 25 साल करने की तैयारी कर रही है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि देश में तंबाकू उत्पाद के उपयोग में कमी लाने के उद्देश्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को मंजूर कर लिया गया है। अब समिति के सुझावों को कैबिनेट के समक्ष रखा जाना है।
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अगर नया कानून लागू होता तो एक 10 रुपए की सिगरेट को खरीदने के लिए ग्राहक को कम से कम 100 रुपए का भुगतान करना होगा। वहीं 10 रुपए से अधिक कीमत की सिगरेट के लिए और ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी।

नियम के मुताबिक अब सिगरेट की खुली बिक्री पर रोक लग जाएगी। एक सिगरेट के लिए भी ग्राहक को पूरा पैकेट खरीदना पड़ेगा।

सार्वजनिक जगह पर धुम्रपान पर ज्यादा जुर्माना!

Sale of Loose Cigarettes Will be Banned

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये तक किया जाना चाहिए। इसके लिए सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 की समीक्षा कर जरूरी संशोधन किए जाने की जरूरत है।

समिति का मानना है कि सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि जो व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट पीता पाया जाएगा, उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है।

तंबाकू से होने वाली बीमारियों पर करोड़ों खर्च
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011 में तंबाकू की वजह से होने वाली सभी बीमारियों पर 1.04 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी तंबाकू के खिलाफ विशेष अभियान चला रखा है।

डब्ल्यूएचओ का मानना है कि सभी देशों में खुली सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगना चाहिए क्योंकि इसी वजह से सिगरेट आसानी से नाबालिगों की तक पहुंचती है। भारत ने भी डब्ल्यूएचओ में इसका समर्थन किया है और इसी के तहत यह कदम उठाया गया है।

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