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सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद भी हो रही लॉटरी की बिक्री

Wed, 17 Oct 2012 10:59 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 17 Oct 2012 10:59 PM IST
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sale of lottery is continue after prohibition of supreme court
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित अन्य राज्यों में नियमों को धता बताकर बदस्तूर जारी लॉटरी की बिक्री के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। इस मसले पर सर्वोच्च अदालत ने इसी वर्ष जुलाई में आदेश जारी किया था जिसमें सख्ती से कहा गया था कि राज्य सरकारें केंद्र के नियमों के मुताबिक इस व्यवसाय का चलन सुनिश्चित करें।
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सर्वोच्च अदालत ने सत्यवीर सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर जुलाई में आदेश जारी किया था। सिंह ने समाचार पत्रों में छपी खबरों व अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के तहत नियमों का उल्लंघन कर बेची जा रही लॉटरी के खिलाफ कार्रवाई न करने वाली राज्य सरकारों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
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याचिका में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली, पंजाब, मेघालय, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और हरियाणा पर शीर्षस्थ अदालत के आदेश का अनुपालन न करने की तोहमत लगाई गई है। इस व्यवसाय के लिए केंद्र ने 1998 में लॉटरीज (नियमन) अधिनियम बनाया था।
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सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में राज्य सरकारों को इसी अधिनियम के प्रावधानों के तहत इस व्यवसाय को व्यवस्थित करने को कहा था। सर्वोच्च अदालत में तब दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा था कि राजधानी में लॉटरी व्यवसाय पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों ने कहा था कि उनके प्रदेश में यह व्यवसाय केंद्रीय अधिनियम के प्रावधानों और नियमों के मुताबिक चल रहा है। जबकि सिंह ने याचिका में दिल्ली के एक अखबार में छपे लॉटरी के परिणाम की प्रति को संलग्न किया है।

इसके अलावा अन्य राज्यों में नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए शीर्षस्थ अदालत से राज्य सरकारों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने की मांग की है। गौरतलब है कि लॉटरी व्यवसाय पर राज्य सरकारों की लापरवाही के खिलाफ सिंह ने 2008 में शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की थी।


अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकारों से जवाब तलब किया था। राज्यों की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद अदालत ने आदेश जारी कर इस मुद्दे का निपटारा कर दिया था।
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