विवादों के 'साक्षी', रेप और मर्डर के भी हैं आरोपी
चार बच्चों को लेकर दिए अपने बयान से विवादों में फंसे भाजपा सांसद साक्षी महाराज की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जिसका जवाब देने के लिए पार्टी ने उन्हें 10 दिन का वक्त दिया है। देखना होगा आखिर वो पार्टी को अपनी सफाई में क्या जवाब देंगे।
हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है जब साक्षी महाराज के साथ ऐसा कुछ हुआ हो। इससे पहले भी उन्होंने कई बार अपने बयानों से विवाद खड़ा किया है।
चार बार से सांसद रहे साक्षी महाराज का पूरा नाम सच्चिदानंद हरि साक्षी है। उनके 15 साल की सियासी पारी पर नजर डालें तो एक बात बिल्कुल सामान्य है और वो है उनकी बयानबाजी।
अकसर ही उनके बयानों से भाजपा की फजीहत हुई। इसके बाद भी पार्टी ने उनके कद को देखते हुए कार्रवाई की कोशिश नहीं की। लेकिन साक्षी महाराज के ताजा बयान पर उठे विवाद के बाद पार्टी ने उन पर कार्रवाई की योजना बनाई और नोटिस जारी कर दिया।
विवादित बयानों से सुर्खियों में रहे
साक्षी महाराज ने अपने ताजा बयान में कहा कि भारतीय महिलाओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। जिसके बाद सियासी दलों के साथ-साथ महिला संगठनों ने भी बयान पर ऐतराज जताया।
इससे पहले साक्षी महाराज ने नाथुराम गोडसे को लेकर एक बयान दिया। जिसमें उन्होंने गोडसे को शहीद करार दे दिया। हालांकि बाद में उन्हें अपने दोनों ही बयानों पर सफाई देनी पड़ी।
जहां बच्चों वाले बयान पर उन्होंने दो से ज्यादा बच्चे होने पर कानून की मांग कर दी। वहीं गोडसे के बयान पर लोकसभा में उन्हें सफाई देते हुए अपने बयान को वापस लेना पड़ा था।
साक्षी महाराज ने इससे पहले एक और विवादित बयान दिया था, जिसमें मदरसों के आतंकियों से संबंध होने के आरोप लगाए थे। इसके साथ-साथ साक्षी महाराज के इतिहास पर गौर करें तो वो राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे।
रामजन्मभूमि आंदोलन से चर्चा में आए
साक्षी महाराज ने सियासी पारी की शुरूआत भाजपा से की। वो भाजपा से उस समय जुड़े जब पार्टी के पास कोई खास जनाधार नहीं था। रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़ने के बाद उन्हें हिंदुत्व का अहम चेहरा माना जाने लगा।
दूसरी ओर उनके पिछड़ा वर्ग और लोध नेता होने का फायदा भी उन्हें मिला। उनके कार्य और अंदाज के चलते अकसर ही वो विवादों में आते रहे। 1998 में फर्रूखाबाद चुनावों में सशस्त्र गार्ड्स ले जाने के भी आरोप उन पर लगे।
1991 में मथुरा से सियासी पारी शुरू करने वाले साक्षी लगातार तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए। हालांकि एक समय वह भी था जब साल 1998 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
उस समय उन्होंने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को लेकर उन पर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज भी किया था। इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा की खिलाफत करते हुए उस समय नारा दिया, 'बाबा नहीं बवाल हूं, भाजपा का काल हूं'।
इसके एक साल बाद उन्हें समाजवादी पार्टी से राज्यसभा के लिए भेजा गया। उस समय मुलायम सिंह यादव एक लोध समुदाय के नेता की तलाश कर रहे थे। जिसके चलते पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सांसद बना कर भेजा। हालांकि साक्षी महाराज वहां ज्यादा दिनों तक नहीं टिके।
एक बार छोड़ा था भाजपा का साथ
मुलायम का साथ छोड़कर साक्षी ने कल्याण सिंह से करीबी बढ़ाई और उनकी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का दामन थाम लिया। इस दौरान 2007 में एटा के सोरो से उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में वो फर्रूखाबाद से मैदान में उतरे। जहां राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर 11वें नंबर पर रहे।
साल 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें फिर से अपने साथ लेकर आई। उन्होंने मैनपुरी के भोगन से चुनाव लड़ा और चौथे स्थान पर रहे। हालांकि पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते उन्होंने उन्नाव से शानदार जीत हासिल कर सांसद बने।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज पर कई क्रिमिनल केस दर्ज हैं। उन पर बाबरी मस्जिद ढहाने में शामिल होने का आरोप है।
साथ ही भाजपा नेता सुजाता वर्मा की हत्या का भी आरोप है। मामला साल 2013 में एटा का है। वो बलात्कार के मामले में तिहाड़ जेल में भी रहे हैं, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं 1997 में उनका नाम भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या में भी आया था।
बड़े 'बिजनेसमैन' हैं साक्षी महाराज
साक्षी महाराज का जन्म एटा जिले के बिलाईपुर गांव में हुआ था। साक्षी ने खुद को हरिद्वार के श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा हरिद्वार का आचार्य महामंडलेश्वर घोषित कर दिया। जो जगदगुरू शंकराचार्य के पद के बराबर बताया जाता है।
साक्षी महाराज ने अपने करियर की शुरूआत साधु के तौर पर की। बाद में पश्चिमी यूपी में लोध बहुल समुदाय से होने का फायदा मिला। साक्षी महाराज शिक्षाविद् के साथ व्यापारी भी हैं।
साक्षी महाराज इसी हफ्ते 59 साल हुए हैं। उन्होंने पीएचडी की डिग्री के साथ-साथ शास्त्री और आचार्य की डिग्री भी हासिल की है। उनके मुताबिक उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और वाराणसी के सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की है।
कई राज्यों में फैला है 'कारोबार'
फिलहाल साक्षी महाराज ने एक ग्रुप बनाया है, जो उत्तर प्रदेश के करीब नौ ट्रस्ट को संचालित करता है। इसके साथ-साथ ये ग्रुप ने शैक्षणिक संस्थाओं को भी संचालित कर रहा है। इनमें से एक हरियाणा, दो बुलंदशहर, एक मैनपुरी में और 13 एटा और कांशीराम नगर में हैं।
उनके शैक्षणिक संस्थानों में से एक का नाम 'मां मदालसा' विद्यालय रखा गया है। जो कि उनकी मां का नाम है। इसे आरएसएस को समर्पित किया गया है, साथ ही इसे विद्या भारती की ओर संचालित किया जाता है।
इसके अलावा साक्षी महाराज के ग्रुप के जरिए विभिन्न राज्यों में करीब 50 आश्रम भी खोले गए हैं। ये आश्रम राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र में मौजूद हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने दर्जनों धार्मिक किताबें भी लिखी हैं।