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कैसे रची गई सहारनपुर दंगे की साजिश?

Sat, 02 Aug 2014 05:34 PM IST
शशांक मिश्र/अमर उजाला, सहारनपुर
शशांक मिश्र/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 02 Aug 2014 05:34 PM IST
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sahranpur riot planned on twenty five july

दंगे की पूरी स्क्रिप्ट मोहर्रम अली उर्फ पप्पू ने एक दिन पहले 25 जुलाई को लिख दी थी। योजना बनाने के बाद उसने अपने गुर्गों से शहर के विभिन्न इलाकों से भीड़ लाने को कहा।

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25 जुलाई की शाम को ही शहर के कई इलाकों से भीड़ रांगड़ों के पुल पर पहुंच गई थी। पहले मोहर्रम ने अकेला ही थाने पहुंचकर दबाव बनाना शुरू किया, मगर बात नहीं मानने पर उसने भीड़ के एक हिस्से को थाने बुला लिया।
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इस बीच वुडकार्विंग में उपयोग होने वाले केमिकल को भी एकत्र कर लिया गया था। इस बीच नमाज के वक्त उसने धर्मस्थल शहीद होने का ऐलान कर लोगों को उग्र कर दिया और उसके गुर्गों ने भीड़ को भड़काकर गुरुद्वार रोड पर उतार दिया।
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पुलिस पूछताछ में दंगे के मास्टर माइंड मोहर्रम अली ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। हालांकि पुलिस को गुमराह करने की भी पूरी कोशिश कर रहा है।

25 जुलाई को बनी दंगे की पूरी योजना

sahranpur riot planned on twenty five july

अब तक जो बातें सामने आई हैं, इसमें 25 जुलाई को उसने दंगे की पूरी योजना बना ली थी। थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसके इशारे पर ही लोगों ने नारेबाजी शुरू की और धर्मस्थल शहीद होने ऐलान करना शुरू किया।

25 जुलाई को शहर के कई इलाकों से करीब 50 से ज्यादा लोग एकत्र किए गए थे और उन्हें लूट के बाद आगजनी की हिदायत दे दी गई थी।

यही कारण है कि भीड़ ने सबसे पहले फायर स्टेशन को निशाना बनाने की कोशिश की, ताकि लूटपाट के बाद आगजनी से लूट की बात सामने नहीं आए।

हालांकि इस दंगे के बाद भी उसे इस बात अंदेशा नहीं था कि पुलिस उसके खिलाफ एफआईआर लिख देगी। यही कारण है कि दंगे के बाद वह घर चला गया था और गुर्गो को अलर्ट कर दिया था।

उन्हें यह भी कहा था कि अगर पुलिस आती है तो उस पर हमला बोल देना। पुलिस ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि उसके सारी साजिश धरी रह गई।

घेराबंदी नहीं होती भाग जाता पप्पू

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दंगे के बाद पप्पू के खिलाफ पर्याप्त सबूत आने के बाद एसएसपी राजेश पांडेय ने उसकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम लगा दी थी।

टीम की नजर पूरी तरह से उस पर लगी हुई थी और उसे यह मामूल था कि घर पर दबिश देते ही फिर से माहौल बिगाड़ने की साजिश होगी। इस बीच पप्पू ने देवबंद में एक नेता से संपर्क कर लखनऊ में सताधारी पार्टी के लोगों से मिलने का समय लिया।

उसकी योजना रामपुर होते हुए लखनऊ पहुंचने की थी और वहां से उसके लोग जमानत के लिए इलहाबाद जाने की भी योजना बना चुके थे। मगर, पुलिस ने घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया।

मोहर्रम अली के खिलाफ कोर्ट में शपथ-पत्र

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दंगे का मास्टर माइंड मोहर्रम अली उर्फ पप्पू के फर्जीवाड़े का खुलासा करीब एक साल पहले न्यायालय में दिए गए शपथपत्र में हो गया था। गुरुद्वारा सिंह सभा के खिलाफ न्यायालय गए अब्दुल वहाब ने ही शपथपत्र देकर मोहर्रम अली पर गंभीर आरोप लगाए थे।

इसके अलावा उस पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और दंगा कराने की आशंका भी व्यक्त की थी। उस वक्त कोर्ट ने पप्पू सहित चार लोगों के खिलाफ उस जमीन में दखलंदाजी न करने का आदेश दिया था।

यही कारण है कि 2010 में विकास प्राधिकरण में नक्शे पर आपत्ति और बाद में न्यायालय में मुकदमे में भी पप्पू ने अपने नाम से नहीं कर हाजी इरफान को वादी बनाया था। उधर, पुलिस गिरफ्त में पहुंचे हाजी इरफान ने भी पूर्व सभासद के फर्जीवाड़े का खुलासा किया है।

वर्ष 2001 में गुरु सिंह सभा ने अग्रवाल परिवार से यह जमीन खरीदी थी। इसके बाद मोहर्रम अली ने अब्दुल वहाब नामक व्यक्ति को मस्जिद का मुतवल्ली बना दिया और उसको वादी बनाकर मामला न्यायालय में ले गया।

वहाब ने दिया था एफिडेविट

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मामला कोर्ट में था, तभी गुरु सिंह सभा ने अपने समाज के तीन व्यक्तियों सहित मोहर्रम अली पप्पू के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की शिकायत की। उधर, अब्दुल वहाब ने न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर मोहर्रम अली की जालसाजी का पर्दाफाश किया था।

अब्दुल वहाब की ओर से दिए गए शपथपत्र में इस बात का जिक्र है कि मोहर्रम अली पप्पू ने ही ब्लैकमेलिंग के लिए केस करवाया था। अब्दुल वहाब ने शपथपत्र में कहा था कि जिस मस्जिद का मुतवल्ली मुझे बनाया गया था, मैंने उसे न तो देखा और न कभी वहां गया।

मोहर्रम अली पप्पू ने मुझे आर्थिक मदद और मजहब के नाम पर भड़का दिया था। एफिडेविट में उसने कहा था कि मोहर्रम अली सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश भी कर रहा है और किसी भी वक्त दंगा करवा सकता है।

अब्दुल वहाब के शपथपत्र के आधार पर न्यायालय ने गुरु सिंह सभा के पक्ष में फैसला दिया और मोहर्रम अली पप्पू सहित चार लोगों को इस जमीन में दखलंदाजी न करने का आदेश दिया था।

पुलिस कस्टडी में इरफान ने बताई सच्चाई

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इसके बाद मोर्हरम अली ने फर्जीवाड़ा कर हाजी इरफान को मस्जिद के इंतजामिया कमेटी का अध्यक्ष बनाने का दावा कर उसे वादी के रूप में खड़ा कर दिया।

वर्ष 2010 में विकास प्राधिकरण में नक्शा प्रस्तुत होने के बाद हाजी इरफान ने ही आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद इसी नाम से न्यायालय में गुरु सिंह सभा के खिलाफ केस विचाराधीन है।

पुलिस गिरफ्त में आने के बाद हाजी इरफान ने भी दंगे के मुख्य सूत्रधार मोहर्रम अली उर्फ पप्पू की धोखाधड़ी का खुलासा किया। उसने पुलिस को बताया कि मुझे नहीं पता कि किसी मस्जिद की कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया गया है।

जिस जगह पर मस्जिद बताकर मोहर्रम ने दंगा कराया, वहां मैं कभी गया ही नहीं। मुझे पैसे का लालच देकर उसने मुझसे शिकायत करवाई थी। कुछ पैसे का लाभ भी कराया था।

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