साहित्य अकादमी: लेखक अवार्ड वापस लेने पर राजी
साहित्य अकादमी ने शुक्रवार को कहा कि नयनतारा सहगल और काशीनाथ सिंह समेत कुछ लेखक अवार्ड वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। इन लेखकों ने देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ का हवाला देते हुए अकादमी का अवार्ड वापस किया था।
अवार्ड लौटाने का प्रावधान नहीं होने के कारण सहगल ने सम्मान वापस लेने का निर्णय किया है। अकादमी ने लेखकों को अवार्ड वापस भेजना शुरू कर दिया है। नयनतारा सहगल को यह पहले ही भेजा जा चुका है।
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की ओर से काशीनाथ सिंह को भेजे पत्र में कहा गया है कि सम्मान की राशि वापस लेने का उनके पास कोई प्रावधान नहीं है।
काशीनाथ सिंह भी हुए राजी
कथाकार काशीनाथ ने शुक्रवार को अकादमी का पत्र मिलने की पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि उस समय देश में हुई घटनाओं के विरोध में एक माहौल बना था।
तब मैंने इस तरह की घटनाओं के प्रति संदेश देने के लिए सम्मान वापस किया था
लेकिन मेरा साहित्य अकादमी से कोई व्यक्तिगत वैर नहीं है।
तिवारी ने
बताया कि राजस्थान के लेखक नंद भारद्वाज भी अवार्ड वापस लेने पर सहमत हो गए
हैं। हालांकि भारद्वाज ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मीडिया से कहा कि
पुरस्कार वापस लेने का मतलब यह नहीं है कि देश में असहिष्णुता खत्म हो गई
है, बल्कि पहले से ज्यादा हो गई है।
संस्कृति मंत्रालय के सूत्र के
मुताबिक कम से कम दस ऐसे लेखक हैं, जो पुरस्कार वापस लेने पर राजी हो गए
हैं। इन लेखकों को भी उनका अवार्ड भेजा जाएगा। अकादमी लेखकों को उस
प्रस्ताव की प्रति भी भेज रही है जो अक्टूबर बैठक में पास किया गया था।
इसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि संविधान में सम्मान लौटाने का कोई
प्रावधान नहीं है।
पिछले साल तर्कवादी लेखक एम.एम. कालबुर्गी की हत्या और
ग्रेटर नोएडा में गोमांस रखने की अफवाह पर इकलाख अहमद नाम के शख्स की
पीट-पीट कर हत्या के बाद करीब 40 लेखकों ने अपना सम्मान लौटाया था।