फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   sahara case in supreme court

सिब्बल की शायरी पर सुप्रीम कोर्ट के जज ने सुनाया शेर

Tue, 24 Mar 2015 09:19 AM IST
Updated Tue, 24 Mar 2015 09:19 AM IST
विज्ञापन
sahara case in supreme court

सोमवार को सुप्रीमकोर्ट में सहारा मुद्दे पर सुनवाई के दौरान उस समय अचानक माहौल काफी खुशगवार हो गया जब वरिष्ठ वकील और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा सुनाए गए शेर का वरिष्ठ न्यायाधीश ने भी शायरी से जवाब दिया।

विज्ञापन


सुनवाई के दौरान सुब्रत राय सहारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जमानत की रकम का जुगाड़ करने केलिए आखिरी मौका देते हुए कहा कि हमारे लिए करो या मरो जैसी स्थिति है।
विज्ञापन


अपनी हालातों को बयां करने के लिए उन्होंने शेर पढ़ा ...रोज की जंग है, कहीं कटी पतंग है। मौका मिला फिर भी लगा रास्ते तो तंग हैं।... सिब्बल की शायरी पर न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा ...बहुत खूब..।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन पीठ केएक अन्य न्यायमूर्ति एके सिकरी ने सिब्बल के शेर का जवाब एक शेर से दिया। न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा ...दर्द सहने की यूं आदत सी हो गई है, जिस दिन न मिले दर्द तो होता है दर्द का अहसास। न्यायमूर्ति सिकरी की इस शायरी से बेहद तनावभरे माहौल में हो रही सुनवाई के बीच कुछ चेहरों पर अनायास मुस्कान दिखाई दी।

कोर्ट ने सहारा को दिया तीन माह का वक्‍त

sahara case in supreme court

इससे पूर्व सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय सहारा को जेल से बाहर निकालने केलिए सहारा समूह को अपनी संपत्तियों को बेचकर जमानत की रकम का जुगाड़ करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है। अदालत ने साफ किया कि यह आखिरी मौका है। अगर इस अवधि तक फंड की व्यवस्था न हो सकी तो संभव है कि शीर्ष अदालत द्वारा कोर्ट रिसीवर को नियुक्त कर दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने सुब्रत राय और समूह के दो निदेशकों को संपत्तियों की डील करने केलिए एक बार फिर से तिहाड़ जेल में विशेष सुविधा प्रदान की है।

इसके तहत उन्हें दो लैपटॉप और मोबाइल फोन की सुविधा दी जाएगी। साथ ही उन्हें इंटरनेट की भी सुविधा मिलेगी। गत वर्ष चार मार्च से जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा को जमानत के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की दरकार है।

सहारा को फंड जुटाने का आखिरी मौका

sahara case in supreme court

पीठ ने सहारा समूह के प्रस्तावित योजना को देखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि समूह द्वारा गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले सिब्बल ने अदालत से गुहार की कि उन्हें फंड का जुगाड़ करने का आखिरी मौका दिया जाए। शीर्ष अदालत ने साथ ही 10 घरेलू संपत्तियों को बेचने की भी इजाजत दी है। इसके अलावा अदालत ने ऐंबी वैली सिटी के कुछ हिस्सों को भी बेचने की अनुमति दे दी है।

सहारा समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि कि वह नकद की व्यवस्था हांगकांग की कंपनी नियोन लिमिटेड के द्वारा करेगी। नियोन लिमिटेड बैंक ऑफ चायना को लोन की रकम चुकाएगी। सहारा समूह ने तीन विदेशी होटलों में हिस्सेदारी केलिए बैंक ऑफ चायना से 820 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ऋण लिया था।

उन्होंने बताया कि नियोन लिमिटेड की जवाबदेही स्पेनिश कॉरपोरेट इनवेसटमेंट बैंक बीबीवीए लिमिटेड ले रही है। ऐंबी वैली के 600 एकड़ जमीन केलिए नियोन लिमिटेड सहारा को 900 मिलियन यूरो ऋण देगा। इसकेअलावा 5000 रुपये बैंक गांरटी की व्यवस्था एचएसबीसी के माध्यम से होगी।

मालूम हो कि सुब्रत राय सहारा और समूह के दो निदेशक गत वर्ष चार मार्च से जेल में बंद हैं। सुब्रत राय को जमानत के लिए पांच हजार करोड़ रुपये नकद और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी की दरकार है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed