भाई-बहन में चुनावी दंगल, राबड़ी के खिलाफ मैदान में साधु
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राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के साले अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने मंगलवार को अपनी ही बहन राबड़ी देवी के खिलाफ सारण लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।
हालांकि उन्होंने राबड़ी देवी के खिलाफ चुनाव लड़ने का कारण नहीं बताया। पत्रकारों के पूछने पर यादव ने इतना जरूर कहा कि चुनाव के समय जनता के बीच इसका खुलासा करेंगे।
जब उनसे कहा गया कि परिवार में ही राजनीतिक लड़ाई का उनका फैसला चौंकाने वाला नहीं है, तो उन्होंने कहा कि सियासत में सब चलता है।
भाई ने बढ़ाई बहन की मुश्किलें
गौरतलब है कि 1977 में पहली बार लालू यादव इसी सीट से चुनाव जीते थे और यहीं से वह चारा घोटाले में फंसने के बाद अयोग्य ठहराए गए।
अब उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी इस सीट पर अपना कब्जा करना चाहती हैं।
साधु यादव का यह फैसला राबड़ी देवी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है क्योंकि पहले ही उन्हें भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से कड़ी चुनौती मिल रही है। इस सीट पर पांचवें चरण के दौरान 7 मई को वोट डाले जाएंगे।
राजद शासनकाल में थी साधु की बड़ी भूमिका
बिहार में 1990 से 2005 के 15 सालों के राजद के शासनकाल में साधु यादव की बड़ी भूमिका रही थी।
बाद में लालू प्रसाद के साथ उनके संबंधों में खटास पड़ गई और 2009 में उन्हें पार्टी से हटा दिया गया।
साधु यादव ने बेतिया लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। हाल ही में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कांग्रेस ने भी उन्हें पार्टी से निकाल दिया था।