फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   saddik involved in illegal activity in jail

सलाखों में रहने वाले सद्दीक के कारनामे जानकर चौंक जाएंगे आप

Wed, 10 Jun 2015 08:53 AM IST
Updated Wed, 10 Jun 2015 08:53 AM IST
विज्ञापन
saddik involved in illegal activity in jail

जेल के अफसर सद्दीक की करतूतों से अंजान नहीं थे, बल्कि इस वीआईपी बंदी को जरूरत की सभी चीजें जेल के कारिंदों की ओर से ही मुहैय्या कराई जा रही थीं। हद ये थी कि सद्दीक जेल के कंप्यूटर का इस्तेमाल करता था, इस पर नेट यूज करता था और सलाखों में होने के बावजूद इंटरनेट पर पूरी दुनिया की सैर कर रहा था।

विज्ञापन


जेल में कैद होने के बाद भी सद्दीक सरकारी कंप्यूटर के जरिए सोशल साइट्स पर सक्रिय था। वो जेल अफसरों का चहेता था लिहाजा उसे राइटर भी बनाया गया था। राइटर होने के नाते उसकी पहुंच जेल के रिकार्ड तक भी थी। वो जेल में हास्पिटल के रिकार्ड को खुद ही अपडेट करता था। यहां तक कि जेल हास्पिटल का स्टाफ उसी के इशारे पर काम करता था। एक बार वो जेल अस्पताल की सरकारी दवाओं को बाहर भेजते वक्त रंगे हाथ पकड़ा गया था लेकिन जेल अफसर मामले को दबा गए।
विज्ञापन


जेल में बंद एक नेता से भी सद्दीक की नजदीकियां रही हैं। जेल आने से पहले तो वो संभल के एक कद्दावर सपा नेता का करीबी रहा ही है। डीएम के छापे में सद्दीक के पास से जब आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए तो आईबी समेत तमाम एजेंसियां हरकत में आ गईं। लेकिन जेल सूत्रों का कहना है कि उसकी संदिग्ध गतिविधियों से जेल का अमला अंजान नहीं था। पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, चिप, सिम सब कुछ के बारे में जेल अफसर जानते थे। बल्कि उनकी नजरों के सामने ही खुलेआम वो इंटरनेट का इस्तेमाल करता था। लेकिन सियासी रसूख की वजह से कभी सद्दीक को टच नहीं किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सद्दीक बोला, मेरे घर के पास है बीएसएफ कैंप

saddik involved in illegal activity in jail

सद्दीक खुफिया एजेंसियों को गच्चा देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। अपने पास से बरामद बीएसएफ कैंप के नक्शे की बाबत सद्दीक ने कहा है कि नक्शें में अंकित बीएसएफ कैंप उसके गांव के पास है। खुफिया एजेंसियों को सद्दीक ने बताया है कि उसने अपने एक दोस्त को अपने घर भेजा था लिहाजा नक्शे पर रूट बनाकर उसे दिया था।

सद्दीक ने खुफिया एजेंसियों को पूछताछ में बताया है कि पश्चिमी बंगाल के दिनाचपुर जिले में उसका गांव बार्डर के पास स्थित है। गांव के पास ही बीएसएफ का कैंप है। सद्दीक ने एजेंसियों को बताया है कि जेल में रहने के दौरान उसकी दोस्ती मुनिदेव नाम के एक बंदी से हो गई थी। यह बंदी कुछ दिन पहले जब जेल से रिहा हुआ तो उसने वादा किया कि वो सद्दीक के घर जाकर उसके परिवार से मिलेगा।

सद्दीक का एजेंसियों से दावा है कि मुनिदेव को अपने घर का पता समझाने के लिए ही उसने बीएसएफ कैंप का नक्शा बनाया था ताकि मुनिदेव आसानी से उसके गांव तक पहुंच सके। दिल्ली में राजीव चौक से नेशनल स्टेडियम - राष्ट्रपति भवन होते हुए कई रूट के नक्शों की बाबत उसने सद्दीक ने एजेंसियों को बताया है कि उसने ये नक्शा एक मैगजीन से काटा था, मैगजीन में रूट डायवर्जन के लिए यह नक्शा छपा था। जेल अधिकारियों का भी कहना है कि बरामद नक्शा राष्ट्रपति भवन का नहीं बल्कि रूट का था जिसमें राजीव चौक, नेशनल स्टेडियम, राष्टपति भवन समेत कई महत्वपूर्ण स्थल भी रास्ते में पड़ते हैं।

सद्दीक से सच नहीं उगलवा सकी एजेंसियां

saddik involved in illegal activity in jail

जिला जेल में आपत्तिजनक दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया सद्दीक सच बताने के बजाए खुफिया एजेंसियों को लगातार घुमा रहा है। एजेंसियां पिछले 72 घंटे में उससे यह नहीं उगलवा सकी हैं कि उसके पास बीएसएफ कैंप और दिल्ली में महत्वपूर्ण रूटों के नक्शे कहां से आए और इन्हें जुटाने के पीछे उसकी मंशा क्या थी। पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, चिप और सिम की हकीकत भी सामने नहीं आई है।

रविवार को डीएम दीपक अग्रवाल और प्रभारी एसएसपी प्रबल प्रताप सिंह के जेल पर छापे के दौरान सद्दीक नजरों में चढ़ा था। उसके पास से तमाम आपत्तिजनक दस्तावेज मिले थे। पश्चिम बंगाल में बार्डर एरिया के जिले दिनाचपुर के बीएसएफ कैंप का नक्शा और दिल्ली के राजीव चौक से लेकर राष्ट्रपति भवन होते हुए कई महत्वपूर्ण रूटों का नक्शा भी सद्दीक के पास मिला था।

उसके पास से तीन रजिस्टर मिले थे जिनमें बंगाली भाषा में संदेश दर्ज हैं। रविवार दोपहर से ही आईबी, स्पेशल ब्रांच और एलआईयू की टीमें सद्दीक को फिल्टर कर रही हैं। दिल्ली से भी आईबी और स्पेशल ब्रांच की टीमें जेल पर डेरा डाले हुए हैं। सद्दीक जुबान खोलने को तैयार नहीं है। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है और उसे बाकी बंदियों से अलग रखा गया है। दूसरी ओर पुलिस इस मामले में ढिलाई बरत रही है। पुलिस ने 72 घंटे बाद भी बंदी सद्दीक के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed