BMW की वजह से विवाद में फंसे 'भारत रत्न' सचिन

टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 06 Feb 2014 06:47 PM IST
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पिछले साल नवंबर में अपना बल्ला टांगने वाले 'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर को रिटायर हुए भले दो-तीन महीने गुजर गए हों, लेकिन मीडिया की उनसे मोहब्बत में जरा कमी नहीं आई है।
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जिस दिन सचिन ने क्रिकेट से रिटायरमेंट ली, उसी रोज सरकार ने उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने का ऐलान किया। ऐसा बताया जाता है कि इसके पीछे सोनिया गांधी और राहुल गांधी की खास भूमिका थी। और इसकी तैयारियों में केवल तीन दिन का वक्त लगा।


मंगलवार को उन्हें दिल्ली में राष्ट्रपति ने वैज्ञानिक सी एन राव के साथ भारत रत्न से नवाजा। अगले रोज से संसद का शीतकालीन सत्र का दूसरा चरण शुरू हुआ। कांग्रेस की सिफारिश के दम पर सचिन को राज्यसभा की कुर्सी मिली है, लेकिन संसद पहुंचने के लिए उनके पास वक्त नहीं था। यह बात जानकर हैरान रह जाएंगे पहले दिन सचिन ने संसद छोड़कर कहां जाने का फैसला किया।

बीएमडब्‍ल्यू को दी ज्यादा अहमियत

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क्रिकेट का यह सितारा जितनी मोहब्बत अपने बल्ले से करता है, उतना ही लगाव उसे तेज रफ्तार गाड़ियों का रहा है। खास तौर पर उन्हें दुनिया की प्रमुख लग्जरी कार ब्रांड बीएमडब्‍ल्यू पसंद आती है, जिसके वो खुद ब्रांड एम्बेसेडर हैं।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर बुधवार को शायद इसलिए संसद नहीं पहुंच सके, क्योंकि उन्हें उससे कहीं ज्यादा जरूरी काम था। वो दरअसल, ग्रेटर नोएडा में मौजूद थे, जहां लग्जरी कार कंपनी बीएमडब्‍ल्यू इंडिया की बीएमडब्‍ल्यू आई8 लॉन्च करने पहुंचे थे। बीएमडब्‍ल्‍यू आई8 को हॉली‌वुड फिल्म 'मिशन इम्पॉसिबल4' में पहली बार दिखी थी।

यूं तो बुधवार को संसद के दोनों सत्रों में कोई खास काम नहीं हुआ और कुछ ही देर में संसद की कार्यवाही स्‍थगित कर दी गई। लेकिन ऐसी उम्मीद थी कि एक रोज पहले जिस शख्स के गले में भारत रत्न का सम्मान डाला गया है, वो संसद जरूर पहुंचेगा।

पहले पहुंचे थे, तो बदल गया था माहौल

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जब दिसंबर में सचिन तेंदुलकर राज्यसभा सांसद मनोनीत किए जाने के बाद पहली बार संसद पहुंचे थे, तो सारी निगाहें उन्हीं पर जा टिकी थीं। चेक शर्ट और ब्लैक पुलओवर में पार्लियामेंट पहुंचे सचिन को उस रोज हाथोंहाथ लिया गया था।

संसद पर हुए हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के बाद उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा था, "यह गर्व की बात है कि सरकार ने सचिन रमेश तेंदुलकर को भारत रत्‍न देने का फैसला किया है, जो सदन के मनोनीत सदस्य और बेहतरीन क्रिकेटर हैं।"

यह बात सही है कि भारत रत्न पाने वाले देश के एकमात्र खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर की काबिलियत को लेकर किसी को शक नहीं हो सकता, लेकिन क्या इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती कि देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया शख्स अगले रोज सत्र के पहले दिन कम से कम संसद जरूर पहुंचेगा।

करोड़ों की मजबूरी है क्या?

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इस कहानी को अगर सचिन तेंदुलकर की तरफ से देखा जाए तो इसकी वजह कुछ-कुछ समझ आती है। बुधवार को ऑटो एक्सपो में बीएमडब्‍ल्यू की एक अहम कार लॉन्च हुई और उन्होंने एक भारतीय ड्राइवर के साथ इससे परदा हटाया।

बीएमडब्‍ल्यू और सचिन का साथ भी पुराना है। वह कंपनी के ब्रांड एम्बेसेडर हैं और कार कंपनी की तरफ से उन्हें मोटी रकम मिलती है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पीछे छूट गया हो और एंडोर्समेंट का सवाल हो, तो सचिन इसे भी नजरअंदाज करने की भूल नहीं कर सकते।

वेल्‍थ एक्स ने दो महीने पहले एक सर्वे कराया था, जिसमें पता चला कि सचिन तेंदुलकर की नेटवर्थ 16 करोड़ डॉलर के आसपास है, जो उन्हें सबसे अमीर भारतीय खिलाड़ी बनाता है।

आज भी चलता है ब्रांड सचिन का सिक्का

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खेल जगत में सचिन तेंदुलकर अपनी बल्लेबाजी और जुनून को लेकर जाने जाते रहे हैं, तो वहीं ब्रांड की दुनिया में उनका सिक्का भी काफी दिनों से चल रहा है। सचिन और धोनी को 2011 में फोर्ब्स की 100 सबसे रईस खिलाड़ियों की सूची में जगह दी गई थी।

मार्केटिंग एक्सपर्ट ने पहले ही अंदाजा लगाया था कि ब्रांड सचिन अपनी रिटायरमेंट के बाद और बढ़ा बन जाएगा। अपनी साफ छवि और विश्वसनीयता के दम पर उत्पादों और बाजार का एक नई रेंज उनके लिए खुल गई है।

तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में मैदान में कदम रखा था और अपने सफर में कई रिकॉर्ड बनाए। उनका करियर देश की आर्थिक ग्रोथ के साथ आगे बढ़ा और साथ आई करोड़ों डॉलर की एंडोर्समेंट। बूस्ट से शुरू हुआ उनका ब्रांड करियर कोका कोला, एडिडास, तोशिबा, कैनन और वीजा तक आया।

क्या राजनीति में आएंगे ब्रांड के प्यारे सचिन?

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रिटायरमेंट लेने के बाद सचिन के पास ब्रांड एंडोर्समेंट का वक्‍त भी है और कॉरपोरेट जगत का एक तबका है, जो उन्हीं के जैसा एम्बेसेडर चाहता है। खास तौर से इंश्योरेंस और फाइनेंशियल प्रोडक्ट जैसे सेगमेंट में एक परिपक्व चेहरे की तलाश रहती है और सचिन से बेहतर उन्हें कौन मिलेगा? लेकिन क्या कॉरपोरेट जगत की आंखों के तारे बने यह गंभीर कदम उठाएंगे?

सचिन के जीवनीकार वैभव पुरंदरे भी कहते हैं कि अगर सचिन सियासत में कूदे तो उन्हें आश्चर्य कोई नहीं होगा, क्योंकि पिछले साल राज्यसभा का सदस्य बनने के बाद से वो एक सार्वजनिक जीवन बिता रहे हैं।

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि सचिन किसी पार्टी के बजाय किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार करना अधिक पसंद करेंगे। वो उसी उम्मीदवार को सपोर्ट करना चाहेंगे जिनका स्पोर्ट्स से गहरा लगाव होगा।"
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