तो बीजेपी का हथियार बनेंगे साबिर अली?
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पूर्व जदयू नेता साबिर अली के भाजपा में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल होने में रोड़ा बने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ उनका विवाद सुलझ गया है।
उस वक्त से राजनीतिक वनवास काट रहे साबिर ने भी सुलह के बाद बिना देरी किए संघ और भाजपा नेताओं से मुलाकात कर पार्टी में शामिल होने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
साबिर ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का दामन थामने में सबसे बड़ा रोड़ा बने नकवी के खिलाफ अवमानना का मुकदमा वापस ले लिया है। नकवी ने भी अदालत से खेद जाहिर कर साबिर से अपनी कटुता भुलाने की बात कही है।
विधानसभा चुनावों में साबिर बनेंगे हथियार
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थामने वाले साबिर को नकवी और अन्य के विरोध के चलते कुछ ही घंटे के अंदर बाहर कर दिया गया था। बावजूद इसके साबिर ने भाजपा परिवार से जुड़ने के अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ी। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद से साबिर ने अपने प्रयासों को और तेज कर दिया था लेकिन उनकी राह में नकवी बाधा थे।
अब नकवी से सुलह होने के साथ ही साबिर ने उनके खिलाफ ठोंका मुकदमा वापस लेकर भाजपा में शामिल होने की अपनी राह सुगम बना ली है। बताया जा रहा है कि न्यायालय में मुकदमा वापस लेने से पहले साबिर ने शुक्रवार को नकवी से उनके मंत्रालय में जाकर मुलाकात की थी।
भाजपा रणनीतिकार बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार पर निशाना साधने के लिए साबिर को हथियार बनाएंगे। इससे पहले पार्टी उनके प्रभाव का लाभ दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उठाना चाहती है। दिल्ली में रह रहे पूर्वांचली वोटों पर भी साबिर की ठीक-ठाक पकड़ मानी जाती है।