गैस पाइप लाइन पर सार्क देशों का खास प्लान
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सार्क देशों की बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काठमांडू पहुंच चुके हैं। इसमें सार्क देशों के बीच प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने पर जोर होगा।
भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका ने प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के आदान-प्रदान के लिए सीमा पार सार्क देशों को पाइप लाइन से जोड़ने की व्यवहारिकता का अध्ययन करने का निर्णय लिया है। साथ ही भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच मौजूदा प्राकृतिक गैस प्रणाली की समीक्षा करने का भी निर्णय लिया गया है।
सार्क के ‘ऊर्जा सहयोग को अंतर-सरकारी समझौते की रूपरेखा’ (आईजीएफए-ईसी) के बैनर तले यह अध्ययन किया जाएगा। साथ ही सार्क देशों के बाहर से गैस, कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को प्राप्त करने को सुविधाजनक बनाने को अंतर-देशीय ग्रिड से जोड़ने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।
इस कार्य योजना के तहत पाइप लाइन के संभावित रास्ते, निर्माण में खर्च, संचालन और रखरखाव के साथ ही सुरक्षा मानकों पर विचार किया जाएगा। बांग्लादेश को इस गैस और तेल कार्य योजना को तैयार करने का काम सौंपा गया है।
कार्य योजना के मुताबिक सार्क देशों में गैस की मांग और आपूर्ति की तुलना में अवसर, संभावनाओं और ईरान, तुर्कमेनिस्तान, म्यांमार से दक्षिण एशिया तक प्रस्तावित गैस पाइप लाइन के प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा।
मौजूदा प्राकृतिक गैस प्रणाली की भी होगी समीक्षा
सार्क ऊर्जा केंद्र (एसईसी) ने अंतरराष्ट्रीय सलाहकार कंपनी और संबंधित अंतर-सरकारी एजेंसी के सहयोग से इस संबंध में अध्ययन करने का आदेश दिया है। भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय चाहता है कि ग्रिड कार्य योजना के सदस्य के रूप में गेल का सहयोजित कर लिया जाए।
तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय समेत अन्य ग्रुप का हिस्सा बनाने के लिए तेल क्षेत्र की बीपीसीएल, एचपीसीएल जैसी कंपनियों आगे किया जा रहा है। सार्क क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार अध्ययन की सिफारिश पर सार्क क्षेत्रीय और उप क्षेत्रीय एलएनजी टर्मिनलों के साथ ही संयुक्त तेल रिफाइनरियों को लगाने की योजना है।
एलएनजी टर्मिनलों के लिए वर्तमान गैस की मांग, आपूर्ति की स्थिति, सदस्य देशों के भविष्य की योजना, टर्मिनलों के निर्माण की कीमत, संभावित स्थान, अर्थव्यवस्थाओं के पैमाने, ट्रैफिक, एलएनजी स्रोत, इसे प्राप्त करने और दुबारा गैसीकरण टर्मिनलों से संबंधित अन्य समस्याओं के मूल्यांकन के लिए अध्ययन करने का निर्णय लिया गया है।
जबकि रिफाइनरियों की कार्य योजना के तहत स्थानों की पहचान, रिफाइनरी प्लांट का आकार और देशों के भौगोलिक स्थिति पर विचार किया जा रहा है। सदस्य देशों द्वारा व्यक्तिगत रिफाइनरियों की अपेक्षा संयुक्त तेल रिफाइनरियों को स्थापित करने के लिए व्यवहारिक अध्ययन किया जाएगा।
आईजीएफए-ईसी ने क्षेत्रीय सामरिक तेल भंडारण सुविधाओं के लिए परिकल्पना की है। इससे आपात काल में सदस्य देशों को सहयोग करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों का संरक्षित किया जाएगा।
इसके तहत ऊर्जा संरक्षण की मात्रा और खपत के स्तर के साथ ही ऐसे स्थान का खोजा जाएगा जहां से संकट अवधि के दौरान गैस और पेट्रोलियम पदार्थों का आदान-प्रदान किया जा सके। सार्क सदस्य देशों कीमत और भौगोलिक जानकारियों को साझा करने का निर्णय लिया है।