भागवत के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
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भागवत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बीते शनिवार को ही पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की जीत में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को मैन ऑफ द मैच करार दिया था तो गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जीत का श्रेय मोदी को दिया था।
परिषद की बैठक के तत्काल बाद भागवत की इस टिप्पणी से चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मोदीमय होने से बचाने की कवायद
माना जा रहा है कि आम चुनाव के बाद से ही भागवत का किसी एक व्यक्ति को जीत का श्रेय न देने संबंधी बयान दरअसल सरकार के बाद संगठन को मोदीमय होने से बचाने की कवायद है।
हालांकि इस टिप्पणी पर विवाद खड़ा होने के बाद संघ ने सफाई देते हुए कहा है कि भागवत के बयान को मोदी या भाजपा नेताओं के बयानों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। जबकि विपक्षी कांग्रेस, जदयू और राकांपा ने भागवत के बयान का समर्थन किया है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को हुई भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जहां राजनाथ ने आम चुनाव में पार्टी को मिली जीत का श्रेय मोदी को दिया, वहीं मोदी ने शाह को जीत में मैन ऑफ द मैच और राजनाथ को कैप्टन करार दिया था।
भागवत ने जीत का श्रेय जनता को दिया
इसके ठीक एक दिन बाद भागवत ने उड़ीसा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आम चुनाव में किसी एक शख्स नहीं बल्कि जनता के कारण राजग को जीत हासिल हुई है।
इससे पहले भी भागवत ने चुनाव परिणाम आने के बाद कई मौकों पर इस आशय की टिप्पणी की थी।
परिणाम आने के बाद भागवत ने जीत का श्रेय जनता को देते हुए याद दिलाया था कि इससे पहले के चुनावों में भी यही पार्टी और लोग थे, लेकिन ऐसा बदलाव संभव नहीं हो सका।
बीजेपी की कार्यशैली बन रही चिंता
कुछ लोग इस जीत का श्रेय पार्टी को देते हैं तो कुछ व्यक्ति विशेष को, लेकिन जीत तभी मिली जब देश की जनता ने निर्णय किया।
दरअसल मोदी को संघ ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार तो कर लिया था, मगर उनकी कार्यशैली को लेकर संघ की चिंता बनी रही।
गुजरात में वीएचपी सहित संघ के अन्य संगठनों के हश्र के मद्देनजर संघ नहीं चाहता कि सरकार के बाद अब भाजपा भी पूरी तरह मोदीमय हो जाए। यही कारण है कि भागवत परिणाम आने के बाद से ही लगातार मोदी को जीत का श्रेय देने से बचते रहे हैं।