{"_id":"1fd2a264-684c-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"ruckus-over-nandy-s-anti-dalit-remarks","type":"story","status":"publish","title_hn":"आशीष नंदी के दलित विरोधी बयान पर बवाल","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
आशीष नंदी के दलित विरोधी बयान पर बवाल
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 27 Jan 2013 12:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जयपुर साहित्य महोत्सव में राजनीतिक मनोविज्ञानी आशीष नंदी द्वारा दिए गए दलित विरोधी बयान की राजनीतिक हलकों में तीखी आलोचना हुई। बयान के कुछ घंटों बाद ही उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
विज्ञापन
राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति मंच के अध्यक्ष राजपाल मीणा ने यह प्राथमिकी दर्ज कराई।
गौरतलब है कि शनिवार को जयपुर साहित्य महोत्सव में जब राजनीतिक चिंतक आशीष नंदी ने कहा था कि यह एक हकीकत है कि अधिकतर भ्रष्ट लोग अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जातियों से आते हैं और अब अनुसूचित जनजाति के लोग भी अधिक संख्या में भ्रष्ट हो रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने पश्चिम बंगाल में न्यूनतम भ्रष्टाचर होने का दावा किया था और कहा था, 'मैं एक उदाहरण देता हूं। सबसे कम भ्रष्टाचार वाला राज्य पश्चिम बंगाल है, जहां माकपा की सरकार थी। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले 100 सालों में अजा, अजजा या ओबीसी का एक भी व्यक्ति सत्ता के करीब नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
नंदी के बयान के खिलाफ राजनीतिक हलकों विशेषकर दलित नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। बसपा सुप्रीमो मायावती और लोजपा नेता राम विलास पासवान ने विरोध जताकर नंदी के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी। मायावती ने कहा कि नंदी को तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए। नंदी के बयान की भाजपा, जदयू, माकपा और अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया ने भी निंदा की।
हालांकि अपने बयान से उपजे बवाल के बाद नंदी ने माफी मांग ली और अपना स्पष्टीकरण भी जारी किया। स्पष्टीकरण में उन्होंने कहा, ''मैंने जो कहा, इस संदर्भ में नहीं कहा था और न ही मैं ऐसा कहना चाहता था। पूरे सत्र में जो बात उठी वह इस प्रकार थी। मैं तरुण तेजपाल की बात का समर्थन कर रहा था कि भारत में भ्रष्टाचार हर तरफ फैला हुआ है।
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार-मुक्त समाज एक प्रकार की तानाशाही जैसा होगा। सत्र में इससे पहले मैंने यह कहा था कि मेरे या रिचर्ड सोराबजी जैसे लोग जब भ्रष्टाचार करते हैं तो बड़ी सफाई से कर जाते हैं, फर्ज करें, मैं उनके बेटे को हार्वर्ड में फैलोशिप दिलवा दूं और वह मेरी बेटी को ऑक्सफोर्ड भिजवा दें। इसे भ्रष्टाचार नहीं माना जाएगा। लोग समझेंगे कि यह उनकी काबिलियत के आधार पर किया गया है, लेकिन जब कोई दलित, आदिवासी या अन्य पिछड़े वर्ग का आदमी भ्रष्टाचार करता है तो वह सबकी नजर में आ जाता है।'
नंदी ने कहा ' हालांकि मेरा मानना है कि इन दोनों भ्रष्टाचारों के बीच कोई अंतर नहीं है और अगर इस भ्रष्टाचार से उन तबकों की उन्नति होती है तो भ्रष्टाचार में बराबरी बनी रहती है। इस बराबरी के बलबूते पर मैं गणतंत्र को लेकर आशावादी हूं। आशा है कि मेरे इस बयान से यह विवाद यहीं खत्म हो जाएगा।'
उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनके बयान से गलतफहमी पैदा हुई है तो मैं माफी चाहता हूं। हालांकि ऐसी कोई बात हुई नहीं थी। मैं किसी भी समुदाय की भावना को आहत नहीं करना चाहता था और अगर मेरे शब्दों या गलतफहमी से ऐसा हुआ है तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।