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आरटीआई के दायरे से बाहर होंगे राजनीतिक दल

Sat, 20 Jul 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 20 Jul 2013 12:05 AM IST
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RTI will be outside the scope of the political party

राष्ट्रीय दलों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून  के दायरे से बाहर करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार अगले महीने से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इसके लिए कानून में जरूरी संशोधन करेगी।

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कानून मंत्रालय ने संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है। पहले सरकार का इरादा अध्यादेश जारी करने का था।

मगर मानसून सत्र की तिथि तय हो जाने और कुछ दलों के अध्यादेश का विरोध करने के बाद आरटीआई कानून में संशोधन पर सहमति बन गई।

सत्र शुरू होने से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार सभी दलों को अपने निर्णय से अवगत करा देगी।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सभी छह राष्ट्रीय दलों को सार्वजनिक प्राधिकरण मानते हुए आरटीआई कानून के तहत लाने का आदेश जारी कर दिया था।
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इस आदेश को आंतरिक कामकाज में दखलंदाजी बताते हुए सभी दल एकजुट हो गए थे।

कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सीआईसी के फैसले के मद्देनजर सरकार की योजना पहले अध्यादेश ला कर आरटीआई कानून में संशोधन करने की थी।

मगर पर्दे के पीछे सभी दलों से हुई बातचीत में भाजपा और सपा ने अध्यादेश जारी करने का विरोध किया।

इनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा विधेयक के संबंध में जारी अध्यादेश का विरोध करने के बाद वे इस मामले में जारी अध्यादेश का समर्थन नहीं कर सकते।

दोनों दलों ने सुझाव दिया कि सरकार इसके लिए मानसून सत्र में संशोधन लाए। अन्य दलों से इस विषय पर बातचीत के बाद सरकार भी संशोधन लाने का तरीका अपनाने के लिए तैयार हो गई।
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सूत्रों के मुताबिक तैयार किए गए संशोधन में कहा गया है कि सीआईसी का राजनीतिक दलों को सार्वजनिक प्राधिकरण मानने का फैसला दलों के आंतरिक क्रियाकलापों के सुचारु रूप से संचालन में रुकावट पैदा करेगा।

राजनीतिक विरोधी इस कानून का गलत इस्तेमाल करने लगेंगे।

इसमें यह भी शामिल किया जाएगा कि जनप्रतिनिधित्व कानून और आयकर कानून पहले से ही दलों के आर्थिक पक्ष के संदर्भ में पर्याप्त पारदर्शिता की व्यवस्था करता है।


साथ ही इस कानून के खंड दो में सार्वजनिक प्राधिकरण की परिभाषा में साफ कर दिया जाएगा कि जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे में आने वाले राजनीतिक दल इसके दायरे में नहीं आएंगे।

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