फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   rti hero arvind kejriwal wont share information

RTI हीरो केजरी के मुंह पर लगा ताला!

Fri, 07 Feb 2014 03:04 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 07 Feb 2014 03:04 PM IST
विज्ञापन
rti hero arvind kejriwal wont share information

सुशासन और पारदर्शिता की कसमें खाकर चुनावों में शानदार जीत दर्ज करने वाली आम आदमी पार्टी इन दिनों दिल्ली की सत्ता पर काबिज है और पानी-बिजली जैसे मुद्दों के बाद अब भ्रष्टाचार के मोर्चे पर कदम उठा रही है।

विज्ञापन


अरविंद केजरीवाल नेता बनने से पहले सूचना के अधिकार (आरटीआई) के प्रचार-प्रसार के लिए काम करते थे और उन्हें आरटीआई का चैम्पियन भी माना जाता था। लेकिन अब शायद रोल बदल गए है।
विज्ञापन


दिल्ली की केजरीवाल सरकार से अब जब इसी कानून के तहत कुछ जानकारी मांगी जाती है, तो वह उसका जवाब देने में कोई खास दिलचस्प नहीं दिखाती। हां, यह जरूर है कि सवाल पूछने वाले को ही घुमा दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

22 विभागों में घुमाई अर्जी, पर जवाब नहीं दिया

rti hero arvind kejriwal wont share information

एचटी की खबर के मुताबिक केजरीवाल सरकार के कुछ अहम फैसलों को लेकर अगर जानकारी मांगी जा रही है, तो ऐसे आग्रह पूरे नहीं किए जा रहे। नोएडा में रहने वाले देवाशीष भट्टाचार्य से ज्यादा इस बारे में कौन जानता होगा।

भट्टाचार्य ने पारदर्शिता की गारंटी देने वाले आरटीआई के कानून के तहत दो अर्जी दाखिल कराई थी। हैरानी की बात यह है क‌ि ये सवाल अब तक 22 विभागों में घूम चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

यह बात और है कि जिन विभागों में यह आरटीआई एप्लिकेशन अब तक घूमी है, उनमें से कई का इससे कोई लेना-देना ही नहीं था। जवाब मांगने के लिए अर्जी करीब एक महीने पहले डाली गई थी, लेकिन जवाब अब तक नहीं आए।

पूछा था शपथ ग्रहण और मकान का खर्च

rti hero arvind kejriwal wont share information

2 जनवरी को अपनी पहली अर्जी में भट्टाचार्य ने उन दो अहम फैसलों से जुड़ी फाइल नोटिंग्स मांगी ‌थीं, जो अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने के तुरंत ‌बाद किए।

दिल्ली की कुर्सी संभालने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि दिल्ली में हर परिवार को सालाना 20 हजार लीटर मुफ्त दिया जाएगा और साथ ही सब्सिडी के जरिए बिजली के बिल भी आधे करने की बात कही गई।

दूसरी आरटीआई अर्जी 4 जनवरी की है, जिसमें पूछा गया है कि रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह और मुख्यमंत्री को आवंटित भगवान दास रोड स्थित आवास पर कितना पैसा खर्च हुआ। हालांकि, डुप्ले केजरीवाल ने बाद में लौटा दिए थे।

उन विभागों को भेजी अर्जी, जिनसे कोई लेना-देना नहीं

rti hero arvind kejriwal wont share information

इन अर्जियों पर दिल्ली सरकार के ज्यादातर विभागों का कहना है कि जो जानकारी मांगी गई है, उसे देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। भट्टाचार्य ने कहा, "जो जानकारी मैंने मांगी, उसे देना काफी आसान है और चीफ सेक्रेटरी ऑफिस के पास जवाब होने चाहिए थे।"

उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे जानकारी देने के बजाय मेरी अर्जियों को उन विभागों के पास भेजा जाता रहा, जिनसे इन सवालों का कोई लेना-देना नहीं था।" जाहिर है, उन्हें इस पर हैरत हो रही है।

पहली अर्जी अग्निशमन विभाग, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड को भेजी गई। इसके बाद दूसरी ‌अर्जी भी इन विभागों के पास रवाना कर दी गई।

खुद आरटीआई एक्टिविस्ट रहे केजरीवाल

rti hero arvind kejriwal wont share information

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त शैलेष गांधी का कहना है कि सरकार आम तौर पर इसी तरह जानकारी मांगने वाले लोगों को प्रताड़ित करती हैं। उन्होंने कहा, "यह बकवास है कि चीफ सेक्रेटरी का ऑफिस कैबिनेट के फैसलों से जुड़ी फाइल नोटिंग्स के बारे में नहीं जानता।"
यहां तक कि अरविंद केजरीवाल के दफ्तर के एक अधिकारी का भी यह कहना था, "आरटीआई के जरिए यह पूछा गया बेहद सरल सवाल था, जिसका जवाब दिया जाना चाहिए था।"

केजरीवाल ने दिल्ली के एनजीओर 'परिवर्तन' के साथ अपना सिवि‌ल सोसाइटी करियर शुरू किया था। यह एनजीओ आरटीआई का इस्तेमाल कर पारदर्शिता तय करने का प्रचार करता था। 2006 में केजरीवाल को आरटीआई पर जागरुकता फैलाने के लिए मैगसेसे अवॉर्ड से नवाजा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed