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नाम बिना बताए भी डाल सकते हैं RTI
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 21 Nov 2013 05:04 PM IST
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व्हिसल ब्लोअर्स को सुरक्षा देने के मुद्दे पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। हाइकोर्ट ने आरटीआई करने वाले की पहचान जाहिर न करने संबंधी महत्वपूर्ण फैसला दिया है।
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कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया कि अपना नाम और पता जाहिर किए बिना भी केवल पोस्ट बॉक्स नंबर देकर ही आरटीआई दायर की जा सकती है।
यह नियम आरटीआई आवेदनकर्ताओं और कार्यकर्ताओं पर होने वाले हमले या प्रताड़ना को ध्यान में रखकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
कोर्ट ने यह आदेश अविशेक गोयनका की याचिका पर दिया। अविशेक ने केंद्र सरकार के विभाग में अपनी पहचान गुप्त रखते हुए केवल पोस्ट बोक्स नंबर लिखकर एक आरटीआई दायर की थी।
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आवेदन पर पता न लिखे होने के आधार पर आरटीआई को अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद अविशेक ने कोर्ट में अपने आवेदन को वैध ठहराने के लिए याचिक दायर कर दी।
हत्या के बाद पाते हैं जगह
अविशेक कहना है कि आरटीआई कार्यकर्ता मानव अधिकारों के लिए लड़ते हैं। भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों व राजनेताओं की अवैध गतिविधियों के विरुद्घ अकेले काम करते हैं।
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उन्होंने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता केवल तब मीडिया में जगह पाते हैं जब उनकी हत्या कर दी जाती है। जब वो कोई शिकायत करते हैं तो कानून से खास मदद नहीं मिलती।
इसलिए ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए। अगर वो केवल पोस्ट बॉक्स नंबर देंगे तो उनकी सुरक्षा ज्यादा संभव हो पाएगी।
अन्य राज्यों को होगी छूट
आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा का साल 2010 में संसद में भी उठ चुका है। उस दौरान महाराष्ट्र में आरटीआई कार्यकर्ता सतीष शेट्टी की हत्या मामले में सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को आरटीआई करने वाले की सुरक्षा का खतरा होने पर उसे सुरक्षा देने का आदेश दिया था।
फिलहाल कोलकाता हाइकोर्ट के यह फैसला केवल पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में ही लागू किया जाएगा। अन्य राज्यों को इसके पालन की छूट होगी।