फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   rti against supreme court administration

सुप्रीम कोर्ट बताए, कितने जजों के बच्चे करते हैं प्रैक्टिस

Sun, 06 Oct 2013 08:34 AM IST
पीयूष पांडेय/दिल्ली
पीयूष पांडेय/दिल्ली Updated Sun, 06 Oct 2013 08:34 AM IST
विज्ञापन
rti against supreme court administration

सुप्रीम कोर्ट के कितने जजों के पुत्र-पुत्री या रिश्तेदार सर्वोच्च अदालत में वकालत की प्रैक्टिस करते हैं?

विज्ञापन


सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए इस सवाल का जवाब न देने पर मुख्य सूचना आयोग ने सर्वोच्च अदालत प्रशासन को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने अदालत के मुख्य जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को व्यक्तिगत तौर पर 30 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि सीपीआईओ स्तर का ही अधिकारी सुनवाई में पेश होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से आरटीआई में यह कठिन सवाल अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने पिछले साल नवंबर में किया था। लेकिन जनवरी में दिए गए जवाब में अदालत की अतिरिक्त रजिस्ट्रार व सीपीआईओ ने कहा कि इस तरह की सूचना को एकत्र नहीं किया जाता।
विज्ञापन


इसके बाद अधिवक्ता ने सूचना न दिए जाने की अपील प्रथम अपीलीय प्राधिकरण में कर दी, जिसे इसी वर्ष मार्च में खारिज कर दिया गया। तब अधिवक्ता ने केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सर्वोच्च अदालत के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के मुताबिक मौजूदा समय सात न्यायाधीशों के बच्चे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जबकि पिता के न्यायाधीश रहते उन्हें प्रैक्टिस नहीं करनी चाहिए।

अधिवक्ता की आरटीआई पर सीआईसी ने इस मसले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए नोटिस जारी करने के साथ ही अदालत के सीपीआईओ को भी तलब कर लिया।

सीआईसी ने पेश होने वाले अधिकारी का नाम, पद और संपर्क करने का नंबर भी पहले से दिए जाने को कहा है। साथ ही कहा है कि जो अधिकारी अदालत के बचाव में आएगा।

वह पहले से लिखित बहस (रिटन सबमिशन) आयोग में दाखिल कर सकता है। 7 जजों के बच्चे सुप्रीम कोर्ट में कर रहे हैं प्रैक्टिस

जवाब नहीं देता सुप्रीम कोर्ट


आरटीआई कार्यकर्ता व अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की मानें तो सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर पूछे गए महत्पूर्ण सवालों के जवाब न देते हुए वेबसाइट देखने को कहता है या फिर अधिकतर सवालों के जवाब में कहा जाता है कि ऐसी सूचना एकत्र नहीं की जाती।


क्या है परंपरा

सर्वोच्च अदालत के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की माने तो यह परंपरा रही है कि यदि किसी वकील का पिता सुप्रीम कोर्ट में जज है तो वह वहां प्रैक्टिस करना छोड़ देता है क्योंकि हितों के टकराव को ध्यान में रखते हुए अदालत के न्यायाधीशों के पुत्र-पुत्री या रिश्तेदारों को प्रैक्टिस नहीं करनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed