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..तो मुफ्ती सरकार के कामकाज को तौलेगा संघ

Sat, 04 Jul 2015 12:30 AM IST
Updated Sat, 04 Jul 2015 12:30 AM IST
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RSS will review of the Mufti Government work

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के चार महीने के कार्यकाल की समीक्षा करेगा। इस सिलसिले में संघ प्रमुख मोहन भागवत को छोड़ कर संघ के अन्य सभी वरिष्ठ नेता 14 जुलाई को जम्मू में मंथन करेंगे।

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दरअसल, भाजपा को पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए हरी झंडी दिखाने के बाद संघ ने खासतौर से कश्मीर घाटी के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने, विकास के माध्यम से सूबे के लोगों की सोच बदलने और अनुच्छेद 370 को खत्म करने के पक्ष में माहौल बनाने का सुझाव दिया था।
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संघ के एजेंडे में कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी का मुद्दा भी अहम था। संघ की राय थी कि सरकार बनाने के बाद समर्थकों, मतदाताओं और देश के अन्य हिस्सों में भाजपा की पहचान साफ नजर आनी चाहिए।
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अब जबकि राज्य में सरकार गठन को चार महीने हो चुके हैं, संघ यह जानना चाहता है कि नई सरकार उनके सुझावों को कितनी तवज्जो दे रही है।

अनुच्छेद 370, सहित कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

RSS will review of the Mufti Government work

हालांकि संघ मानता है कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के मामले में केंद्र सरकार सक्रिय हुई है, मगर वह पुनर्वास के काम में तेजी लाना चाहता है। आगामी बैठक में मुख्य रूप से सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले और संघ में भाजपा के प्रभारी कृष्ण गोपाल शिरकत करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, संघ के पदाधिकारी भाजपा के साथ राज्य सरकार की कार्यप्रणाली के संबंध में न केवल अनुभव साझा करेंगे, बल्कि कुछ जरूरी सुझाव भी देंगे। संघ के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि चूंकि सूबे में पीडीपी के साथ सरकार बनाना एक समय असंभव बात थी।

मगर बाद में संघ ने महसूस किया कि सरकार बना कर सूबे में अनुच्छेद 370 के खिलाफ माहौल तैयार करने के साथ-साथ विकास के माध्यम से खासतौर से युवाओं को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। उक्त नेता के मुताबिक, सवाल महज सरकार में शामिल होने का नहीं है।

बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार में शामिल होकर अपनी अलग पहचान कायम रख पा रही है या नहीं। पार्टी के सिद्घांतों और विचारधारा के अनुरूप सरकार की ओर से ठोस पहल हो पाई है या नहीं। उक्त नेता के मुताबिक संघ, भाजपा के सामने सरकार बनाने से पूर्व व्यक्त की गई अपेक्षाओं पर हुई पहल की गहन समीक्षा करेगा।

कश्मीरी पंडितों की वापसी सबसे अहम

संघ का मानना है कि अगर कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की वापसी कराई गई तो यह हर दृष्टि से एक बड़ी सफलता होगी। हालांकि पुनर्वास के काम में फिलहाल बड़ी बाधा है।

केंद्र सरकार अलग टाउनशिप में उनका पुनर्वास चाहती है, जबकि पीडीपी ने अब भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। संघ का मानना है कि केंद्र को न केवल अपने रुख पर अडिग रहना चाहिए, बल्कि इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।

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