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'खास' मकसद के लिए अब विदेश में पैर पसारेगा संघ

Sun, 05 Oct 2014 04:58 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Oct 2014 04:58 PM IST
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केंद्र में मोदी सरकार के रूप में मैत्रीपूर्ण निजाम आने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी पहचान को वैश्विक स्तर पर ले जाने की योजना बनाई है। इसके तहत प्रवासी भारतीयों की बड़ी आबादी वाले फ्रांस, इटली, नार्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, नीदरलैंड में शाखाएं खोलने की तैयारी की जा रही है। संघ की इस तैयारी को उसकी विचारधारा के प्रसार ही नहीं उसकी कट्टर हिंदूवादी संगठन की छवि को तोड़ने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

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वैश्विक स्तर पर राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक-सामाजिक संगठन की छवि बनाने के लिए इन देशों में वैचारिक रूप से निकट प्रवासी भारतीयों को संघ की शाखाओं में आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वैसे संघ विदेश में हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) के नाम से कुछ जगहों पर शाखाओं का आयोजन करता है मगर आधिकारिक रूप से ये आरएसएस की शाखाएं नहीं हैं। संघ बीते दशकों में भाजपा के जरिए अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर लगातार गैर भाजपाई सरकारों के निशाने पर रहा है।
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यूपीए सरकार में तो संघ को अपने कुछ कार्यकर्ताओं के कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के कारण सवालों के कठघरे में खड़ा किया गया। अपने वजूद पर हुए इन हमलों की वजह से ही संघ ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की सरकार बनाने में अपनी पूरी संगठन क्षमता झोंक दी। न्यूयार्क में मोदी के लिए प्रवासी भारतीयों में दिखी दीवानगी के बाद संघ को वैश्विक प्रसार के लिए यह सबसे माकूल समय नजर आ रहा है।
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रामवैद्य को यूरोप में शाखा खोलने की जिम्मेदारी

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माना जा रहा है कि शाखा खोलने की योजना को हकीकत में तब्दील करने के मकसद से ही संघ के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले और राम वैद्य इस समय यूरोपीय देशों की यात्रा पर हैं। होसबोले और वैद्य ने भारत-फ्रांस के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने के लिए पेरिस में हुए कार्यक्रम में शिरकत की। दोनों ने पेरिस स्थित रामकृष्ण मिशन और ब्रह्मकुमारी आश्रम का दौरा भी किया। लंदन में संघ के प्रचार का काम कर चुके रामवैद्य को खासतौर पर यूरोप में शाखा खोलने की जिम्मेदारी दी गई है। रामवैद्य आरएसएस के प्रमुख नेताओं में से एक मनमोहन वैद्य के भाई हैं।

सूर्य उपासना सम्मेलन में कई देशों के जनजातीय समुदाय आमंत्रित
संघ कर्नाटक के मैसूर में फरवरी में होने वाले सूर्य उपासना सम्मेलन में कई देशों के जनजातीय समुदायों को निमंत्रित कर रहा है। इसमें न्यूजीलैंड की मोओरी तो मेक्सिको की मयान जनजाति के प्रतिनिधि आमंत्रित हैं। संघ ने छह साल पूर्व नागपुर में यह सम्मेलन किया था। यह सम्मेलन भी संघ की वैश्विक पहचान बनाने की योजना का हिस्सा है। माना जा रहा है कि इसी सिलसिले में भैयाजी जोशी ने कुछ समय पहले अमेरिका और यूरोप की यात्रा की थी।

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