'शाह टीम' में संघ के 9 नेता, ये है RSS का अगला प्लान
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इस टीम में संघ के 9 नेताओं को जगह दी गई है। दरअसल पहली बार बहुमत की सरकार बनने के बाद संघ खासतौर से संगठन को व्यक्ति केंद्रित के बदले विचारधारा केंद्रित रखना चाहता है। वह नहीं चाहता कि वाजपेयी सरकार के कार्यकाल की तरह ही मोदी सरकार के कार्यकाल में भी वैसी ही ‘चूक’ हो।
इसलिए संघ ने भाजपा संगठन में खुद से जुड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी दिला कर भाजपा के साथ-साथ सरकार पर भी निगाह रखने और जरूरत पड़ने पर संगठन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बनाई है। इसी रणनीति के तहत ही संघ ने पहली बार भाजपा के अंदरूनी मामले में परोक्ष हस्तक्षेप की जगह बिना हिचक सीधे और सार्वजनिक हस्तक्षेप की शुरुआत की है।
वाजपेयी कार्यकाल से ही चल रही थी संघ की योजना
संघ सूत्रों के मुताबिक वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान विचारधारा से जुड़े एजेंडे पर मिली असफलता के बाद से ही संघ ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। पहले जहां पार्टी में संघ की भूमिका महज संगठन महासचिव तक सीमित थी, वहीं बाद में इसे विस्तार देने का प्रयास शुरू हुआ।
इस कड़ी में जहां नए सिरे से सह संगठन महासचिव के दो पद सृजित किए गए, वहीं संगठन महासचिव के इतर अन्य पदों पर भी संघ नेताओं को जगह देने का रास्ता साफ किया गया। इसी कड़ी में मुरलीधर राव, प्रभात झा जैसे नेताओं को संगठन में जगह दिलाई गई।
अब नई टीम में सह संगठन महासचिव की संख्या 2 से बढ़ा कर 4 कर दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी संघ से भाजपा में आए नेता ही उठाएंगे। इसके अतिरिक्त नई टीम में हाल ही में भाजपा भेजे गए राम माधव को महासचिव पद की अहम जिम्मेदारी दी गई। जबकि विनय सहस्त्रबुद्घे को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब निगाहें संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति पर
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नई टीम घोषित हो जाने के बाद अब सबकी निगाहें पार्टी की सर्वाधिक ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड और बेहद महत्वपूर्ण इकाई केंद्रीय चुनाव समिति पर टिक गई है।
शाह के अध्यक्ष बनने के बाद जहां कद्दावर नेताओं से भरे 12 सदस्यीय बोर्ड से किसी एक नेता की छुट्टी तय है, वहीं शाह टिकट पर अंतिम फैसला करने वाली इकाई चुनाव समिति में बड़े बदलाव के इच्छुक हैं। माना जा रहा है कि संसदीय बोर्ड से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी खेमे के माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की छुट्टी होगी।
संसदीय बोर्ड में पार्टी के संविधान के मुताबिक पूर्व अध्यक्षों और संगठन महासचिव को जगह दिया जाना अनिवार्य है। इस समय 12 सदस्यीय बोर्ड में बतौर पूर्व अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी शामिल हैं तो रामलाल बतौर संगठन महासचिव।
सुषमा, जेटली की अनदेखी नहीं कर सकते शाह
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रसायन उर्वरक मंत्री अनंत कुमार, सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत भी बतौर सदस्य बोर्ड में शामिल हैं। चूंकि गहलोत बोर्ड में अकेले अनुसूचित जाति के सदस्य हैं, इसलिए इन्हें हटाए जाने की संभावना नहीं है, जबकि शाह सुषमा, जेटली की अनदेखी नहीं कर सकते।
इसलिए माना जा रहा है कि आडवाणी कैंप को बोर्ड से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। इसके अलावा चुनावी टिकटों पर अंतिम फैसला करने वाली इकाई चुनाव समिति पर भी सबकी निगाहें हैं। सूत्रों के मुताबिक खुद शाह 19 सदस्यीय समिति में बड़े बदलाव के पक्षधर हैं। इस समिति में संसदीय बोर्ड के सभी 12 सदस्यों के अलावा अन्य 7 नेताओं को जगह दी गई है।
जबकि गोपीनाथ मुंडे के निधन से समिति में एक स्थान रिक्त है। माना जा रहा है कि इन सात सदस्यों में से शाह कई नेताओं को हटा कर नए चेहरे लाएंगे। सूत्रों के मुताबिक विनय कटियार, शाहनवाज हुसैन, जुएल उरांव और अनंत कुमार की समिति से छुट्टी हो सकती है।