संघ ने सौंपा मोदी सरकार को अपना एजेंडा, क्या होगा लागू?
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठन राम मंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता जैसे चर्चित और पुराने मुद्दों के इतर अन्य वैचारिक मुद्दों पर मोदी सरकार को ज्यादा ढील देने के पक्ष में नहीं है।
संघ चाहता है कि सत्ता में बदलाव के बाद लोगों को सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों में भी उसकी विचारधारा के अनुरूप जल्द से जल्द बदलाव की बयार बहती दिखे। सरकारी कार्यक्रमों में आए बदलाव से खुश संघ लगे हाथ इतिहास के पाठ्यक्रमों, धर्मांतरण कानून में बदलाव की ओर तत्काल कदम बढ़ाने का पक्षधर है।
संघ विदेशी निवेश के मुद्दे पर तो सरकार का समर्थन कर रहा है, लेकिन साथ ही आर्थिक क्षेत्र में स्वदेशी मॉडल को भी आगे बढ़ाने का पक्षधर है। खास बात यह है कि संघ के अनुषांगिक संगठनों भी अपनी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनाए रखने का हवाला देकर इन मुद्दों पर संघ से हस्तक्षेप का लगातार अनुरोध कर रहे हैं।
मेड बाय इंडिया पर काम करने का सुझाव
यही कारण है कि नई सरकार गठित होने के बाद जहां स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के इतर मेड बाय इंडिया को आजमाने का सुझाव दिया तो दूसरी ओर संघ ने इसी हफ्ते भाजपा नेताओं और मंत्रियों के साथ बैठक कर उन्हें अपने एजेंडे से परिचित कराया।
इसी सिलसिले में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के साथ हुई बैठक को पाठ्यक्रम में बदलाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है। संघ के एक वयोवृद्घ नेता ने बताया, ‘राम मंदिर, धारा 370, समान नागरिक संहिता मामले में संख्या बल, संविधान, विभिन्न दलों का समर्थन हासिल करने जैसे कई पेंच हैं।
मगर वामपंथियों द्वारा लिखे गए इतिहास जिसमें हमारी गौरवशाली परंपराओं और आदर्श व्यक्तियों का मजाक उड़ाया गया है, उसे दुरुस्त करने में कोई कठिनाई नहीं है।’ स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ सहित अन्य संगठनों का मानना है कि वाजपेयी कार्यकाल में विचारधारा के अनुरूप बदलाव न होने के कारण लोगों में विश्वसनीयता घटी थी।