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चुनाव से पहले भाजपा में एकजुटता चाहता है संघ
हरीश लखेड़ा
Updated Sun, 07 Jul 2013 12:25 AM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अंदरूनी कलह से जूझ रही भाजपा को लोकसभा के सियासी महाभारत में कूदने से पहले एकजुट होते देखना चाहता है।
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संघ की यह भी कोशिश है कि भाजपा ही नहीं बल्कि विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत पूरे संघ परिवार में भी एकता दिखे।
लालकृष्ण आडवाणी के बाद शनिवार को नागपुर जाकर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की संघ प्रमुख मोहन भागवत से हुई मुलाकात को संघ की इसी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
अब आगे भी संघ परिवार के प्रमुख नेता नागपुर जाते दिखेंगे।
भाजपा के गोवा सम्मेलन में नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने और उसके बाद आडवाणी के कोप भवन में चले जाने की घटनाओं से पार्टी की आंतरिक कलह जिस तरह से खुल कर सामने आई, उससे संघ चिंतित है।
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यह सब ऐसे मौके पर हुआ जब भाजपा को जल्द ही लोकसभा और पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस से दो-दो हाथ करने हैं।
इस कलह से लोगों में यह संदेश चला गया कि भाजपा अब कांग्रेस को क्या शिकस्त देगी जो खुद आपस में ही लड़ रही है।
इसलिए संघ ने भाजपा से दो टूक कह दिया है कि आगामी चुनाव से पहले अंदरूनी खटपट का पूरी तरह से पटाक्षेप होना चाहिए।
लोगों में भी संदेश जाना चाहिए कि भाजपा एकजुट है। क्योंकि कांग्रेस तो पहले से एकजुट है और इधर तीसरे खेमे के दलों में भी एकजुटता बढ़ी है।
इसलिए भाजपा ने भी एकजुटता का संदेश देने के मकसद से संसदीय बोर्ड से लेकर चुनाव अभियान समिति की बैठकें बुलाईं। अब आठ जुलाई को भी संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है।
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जल्दी-जल्दी बैठकें बुलाकर और उसमें सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर बिठाकर यही संदेश देने की कोशिश है कि पार्टी एकजुट है, उसकी अंदरूनी लड़ाई अब खत्म हो चुकी है।
भाजपा मानने लगी है कि चुनाव से पहले उसे एनडीए में नये साथी मिल पाना कठिन है। इसलिए खुद एकजुट होकर लोकसभा में 180 से 200 सीटें जीती जाएं।
इसके बाद धर्म निरपेक्षता का राग अलाप रहे दल भी भाजपा के साथ होंगे।