शिक्षा क्षेत्र में शोध और अनुसंधानों में बदलाव चाहता है संघ
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संघ परिवार अब शिक्षा जगत में होने वाले शोध और अनुसंधानों को राष्ट्र हित से जोड़ने की कवायद में जुटा है। इस प्रयास में संघ की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देश के तमाम शिक्षण संस्थानों में होने वाले शोध और अनुसंधानों के पैटर्न में बदलाव करने को कहा गया है।
संघ परिवार का मानना है कि शोध और अनुसंधान के लिए जारी वर्तमान पैटर्न प्रभावी नहीं है। राष्ट्रहित में इनका योगदान न के बराबर है। शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाले संघ के संगठन भारतीय शिक्षण मंडल का कहना है कि अनुसंधान देश के पुनरुत्थान के लिए उपयोगी होने चाहिए।
पीएचडी और विशेष डिग्रियों के लिए होने वाले शोध और अनुसंधान महज दिखावा बनकर रह गए हैं। देश भर से 40 से ज्यादा विश्वविद्यालयों और विद्यालयों के कुलपतियों ने इस सम्मेलन में अपने पहुंचने की सहमति प्रदान कर दी है। सम्मेलन का उदघाटन 11 फरवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी करेंगी।
स्मृति ईरानी को संघ ने भेजे सुझाव
बताया जा रहा है कि वर्तमान अनुसंधान और शोध पैटर्न की कमियों को लेकर संघ के संगठन ने बीते कुछ महीनों में दो दर्जन से ज्यादा विश्वविद्यालयों से अपने स्तर पर चर्चा की है।
इसलिए वर्तमान पैटर्न में बदलाव की जरूरत है। सूत्र बताते हैं कि संस्थान ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को अपने सुझाव भी भेजे हैं।
भारतीय शिक्षण मंडल के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध और अनुसंधान मौलिक, व्यावहारि क, राष्ट्रहित और समाज के लिए उपयोगी होने चाहिए।
इस पर विचार के लिए एक सम्मेलन आयोजित किया गया है। इसमें देश भर से 40 से ज्यादा विश्वविद्यालयों और विद्यालयों के कुलपतियों ने पहुंचने की सहमति प्रदान कर दी है। सम्मेलन का उदघाटन 11 फरवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी करेंगी।