शंकराचार्य विवाद से मुश्किल में RSS
शारदा मठ द्वारिका और ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिरडी के साईं बाबा को भगवान न मानने वाले बयान से सहमति और असहमति को लेकर सबसे ज्यादा मुश्किल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फंस गया है।
लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से लेकर हर मुद्दे पर संघ और विश्व हिंदू परिषद के रास्ते की किरकिरी बने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं पूजा को राम मंदिर आंदोलन को कमजोर करने वाला बताकर विश्व हिंदू परिषद के सामने भी नई चुनौती पेश कर दी है।
बोल्ड हो सकता है संघ
नाम न छापने की शर्त पर संघ के एक प्रचारक का कहना है कि शंकराचार्य की गुगली से हम क्लीन बोल्ड भी हो सकते हैं। आजादी के आंदोलन में जेल जा चुके स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महात्मा गांधी के विचारों और इंदिरा गांधी के नेतृत्व से बेहद प्रभावित रहे हैं।
एक जमाने में चारो शंकराचार्यों को एकजुट करके अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए रामालय न्यास बनवाने के सूत्रधार रहे सर्वसाविक अध्यात्मिक जागृति संघ (यूनिवर्सल एसोसिएशन ऑफ स्प्रिचुअल अवेअरनेस) के संस्थापक अध्यक्ष पंडित नरेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि शंकराचार्य ने जो मुद्दा उठाया है उस पर संघ को अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए।
बड़ी संख्या में हैं साईं भक्त
यह सवाल पूरे हिंदू समाज और सनातन धर्म से जुड़ा, हिंदुत्व की दुहाई देने वाला संघ और विहिप इसे अनदेखा नहीं कर सकते।
संघ केसामने संकट यह है कि हिंदुओं में बड़ी तादाद साईं भक्तों की है जबकि शंकराचार्य ने साईं को लेकर जो मुद्दा उठाया है अगर संघ उसके खिलाफ जाता है तो उससे संघ के हिंदुत्व की बुनियाद पर ही चोट होगी।
क्योंकि संघ ने अभी तक अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हिंदुत्व की जो घुट्टी पिलाई है, उसकी वजह से संघ से जुड़े कई लोग दबी जुबान से शंकराचार्य की बात से सहमति जता रहे हैं।
विवाद से संकट में संघ
सनातन धर्म और दर्शन के विद्वान ओम प्रकाश पांडे स्वामी स्वरूपानंद से पूरी सहमति जताते हुए कहते हैं कि शंकराचार्य जी ने बेहद बुनियादी प्रश्न उठाया है इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
संघ से जुड़े एक नेता के मुताबिक पहली बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपनी ताकत से पूर्ण बहुमत मिलने की एक बड़ी वजह हिंदू ध्रुवीकरण भी है।
तब अचानक शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं बाबा को भगवान मानकर हिंदुओं द्वारा उनकी पूजा पर सवाल उठाकर इस ध्रुवीकरण को हिला दिया है।
मामले से दूर बनाए हुए है संघ
शंकराचार्य के बयान के बाद साईं भक्त जिस तरह उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और पुतले जला रहे हैं, उससे अनेक सनातन धर्मी नाराज हैं।
फिर शंकराचार्य ने जो मुद्दे उठाए हैं, संघ उनके खिलाफ खुलकर अगर गया तो उसके हिंदुत्व पर सवाल उठेंगे और अगर शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा होता है तो करोड़ों साईं भक्त हिंदुओं की नाराजगी उसे झेलनी होगी।
इसलिए संघ और विहिप ने फिलहाल इस मुद्दे से अभी तक खुद को अलग रखा हुआ है, लेकिन अगर यह मामला बढ़ता है तो उसकी समस्या बढ़ेगी।