RSS ने मोदी को बताया, नंबर कम रहे तो कैसे बनेगी सरकार!
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भाजपा का अनुमान है कि 16 मई को वो अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने लायक पर्याप्त नंबर जुटा लेगी, लेकिन राजनीति ऐसी चीज है, जिस पर सटीक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
यही वजह है कि कोई मौका नहीं चूकना चाहता। कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भाजपा को सलाह दी है कि उसे केंद्र में मजबूत और स्थिर सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विरोधी क्षेत्रीय दलों से बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि यह सलाह भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह तक पहुंचा दी गई है, जिन्होंने हाल में दिल्ली संघ मुख्यालय में आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी।
आरएसएस ने दिया मोदी को मंत्र
इस मौके पर मौजूद संघ के नेताओं का कहना था कि भाजपा की तरह उन्हें भी उम्मीद है कि वो जरूरी सीटें जुटाने में कामयाब रहेगी, लेकिन उसे मजबूत सरकार बनाने के लिए उन दलों से संपर्क साधना चाहिए, जो उसके प्रतिद्वंद्वियों के करीब नहीं हैं।
भाजपा के एक सूत्र ने संघ नेताओं का हवाला देते हुए कहा कि जो दल फिलहाल किसी के साथ नहीं और संभावित साझेदार बन सकते हैं, उनसे तुरंत बातचीत शुरू करना जरूरी है।
आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि चुनाव बाद की संभावनाओं से निपटने के लिए एक टीम तैयार रहनी चाहिए, हालांकि फिलहाल इस बात पर चर्चा सही नहीं कि किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा।
राजनाथ सिंह से भी मुलाकात
आरएसएस के जिन नेताओं ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की, उनमें संघ महासचिव भइयाजी जोशी और सुरेश सोनी शामिल हैं। इसके अलावा संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल भी थे।
शनिवार को भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद राजनाथ सिंह झंडेवालान स्थिति संघ के दिल्ली मुख्यालय पहुंचे।
मोदी और आरएसएस प्रमुख की मुलाकात ने कांग्रेस को एक बार फिर यह मामला उछालने का मौका दिया कि वो कोई और नहीं, बल्कि रिमोट कंट्रोल से चलाए जाने वाली कठपुतली हैं।
कांग्रेस ने बोला आरएसएस पर हमला
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "देश के लोग कई दशकों से देख रहे हैं कि यह नागपुर का ऐसा रिमोट कंट्रोल है, जिसकी कोई जवाबदेही नहीं है। और पीएम बनने का ख्वाब देखने वाला भी कोई 56 इंच सीना वाला नहीं, बल्कि रिमोट कंट्रोल से चलने वाला शख्स है।"
दरअसल, मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बार-बार हमला किया था कि उनका रिमोट कंट्रोल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास है। कांग्रेस ने अब जवाबी हमला किया है।
मोदी ने लोकसभा चुनावों के अंतिम दौर का प्रचार खत्म करने के बाद शनिवार को आरएसएस के नेतृत्व से मुलाकात की थी। भाजपा प्रमुख राजनाथ सिंह ने अगले दिन ऐसा किया।
कांग्रेस VS आरएसएस या गांधी फैमिली VS मोदी
इन मुलाकातों में दोनों नेताओं ने आरएसएस के साथ चुनावों के बाद बनने वाली संभावनाओं पर चर्चा की। कांग्रेस ने मुलाकातों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरएसएस खुद को सांस्कृति संगठन कैसे कह सकता है, जब वो राजनीति और खास तौर से दल विशेष के साथ इस स्तर तक सक्रिय है।
यूपीए ने चुनाव प्रचार को शुरुआत में आरएसएस बनाम कांग्रेस का रंग देने की कोशिश की थी और मोदी को उसका अगुवा बताया था। लेकिन बाद में मोदी-गांधी परिवार के बीच सीधा मुकाबला हुआ।
यह देखना बाकी है कि मोदी को इस तरह पेश कर अल्पसंख्यक वोट हासिल करने के मामले में कितनी कामयाबी मिली होगी, क्योंकि ध्रुवीकरण की वजह से बहुसंख्यक भी भाजपा के पीछे लामबंद हो सकते हैं।