अब धर्मांतरण को मंजिल तक पहुंचाने में जुटा भगवा परिवार
विवादास्पद घर वापसी अभियान को लेकर धर्मांतरण पर छिड़ी सियासी बहस को भगवा परिवार अब मंजिल तक पहुंचाने में जुट गया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने बयानों से साफ कर दिया कि भगवा परिवार में धर्मांतरण के मुद्दे पर कोई असमंजस नहीं है। केंद्र सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह इस मामले पर बहस को तैयार है। संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू पहले ही विपक्ष को धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने की चुनौती दे चुके हैं। ऐसे में संघ धर्मांतरण के खिलाफ कानून की मांग को लेकर लंबा अभियान चलाने की तैयारी में है।
इस मसले पर सरकार के संशय को दूर करने और भावी रणनीति को अंजाम देने के लिए खुद संघ प्रमुख भागवत दिल्ली में 28 दिसंबर तक डेरा डाले रहेंगे। वह सरकार और भाजपा के आला नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में धर्मांतरण के अलावा उन मुद्दों पर भी चर्चा होगी जिनको लेकर मोदी सरकार और संघ के सहयोगी संगठनों के बीच मतभेद हैं। संघ नेतृत्व मोदी सरकार से धर्मांतरण के खिलाफ जल्द कानून लाने का आग्रह करेगा तो आर्थिक मसलों पर भी अपनी चिंता जाहिर करेगा।
बताया जा रहा है कि भागवत के दिल्ली में रहने के दौरान धर्मांतरण के खिलाफ कानून की मांग पर सड़क से लेकर शहरों तक माहौल गरमाने के प्रयासों की रूपरेखा बनाई जाएगी। अगले साल मार्च में नागपुर में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ धर्मांतरण के मुद्दे को पेश करेगा।
संघ सूत्रों के अनुसार धर्मांतरण के खिलाफ कानून की अपनी मांग को धार देने के लिए दिल्ली में एक बड़े बौद्धिक कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी हो रही है। उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश को इस कार्यक्रम की कमान सौंपने पर विचार हो रहा है ताकि कानूनी पहलुओं को जनमानस के सामने रखा जा सके। संघ अपने तमाम संगठनों के जरिए हर प्रदेशों की राजधानी में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की अपनी मांग पर सेमिनार भी आयोजित करेगा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने धर्मांतरण की खिलाफत करते हुए घर वापसी अभियान पर गोलमोल जवाब देकर संघ के एजेंडे के साथ अपने को ला खड़ा किया है। भाजपा महासचिव पी मुरलीधर राव का भी कहना है कि घर वापसी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक की धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक न लगे।
हैदराबाद में बनेगी भगवा हथियारों को धार देने की रणनीति
धर्मांतरण व लव जिहाद के मुद्दे पर उठे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद की प्रबंध समिति की 26 दिसंबर से हैदराबाद में चार दिवसीय बैठक हो रही है। इस बैठक में विहिप अब तक चल रहे अपने कार्यक्रमों की समीक्षा करेगी तो भगवा हथियारों को धार देने की नई रणनीति भी बनेगी। साथ ही तय होगा कि राम मंदिर और धर्मांतरण सहित अन्य कौन-कौन से मुद्दों को उठाकर संघ परिवार के पक्ष में माहौल बनाया जा सकता है।
बैठक में बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी के बदले रुख और बयान के मद्देनजर राम जन्मभूमि मुद्दे पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। विहिप के रणनीतिकार मंदिर मुद्दे और हाशिम के बयान पर बहस चलाना चाहते हैं। इसके मद्देनजर भी बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा। इस सिलसिले में संगठन की तरफ से नए अभियान की रूपरेखा भी खींचे जाने की संभावना है। धर्मांतरण और लव जिहाद पर विवादों के बावजूद भगवा टोली अंदर से काफी गद्गद है। टोली के रणनीतिकारों का मानना है कि तमाम कोशिशों के बावजूद धर्मांतरण के मुद्दे पर पहले कभी वैसा माहौल नहीं बन पाया जैसा इस बार बन गया। इसलिए हैदराबाद में बैठक में यह विषय भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में इस मुद्दे पर देशव्यापी जनजागरण अभियान की रूपरेखा भी तैयार की जा सकती है।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
बैठक में गोरक्षा और मठ-मंदिरों की सुरक्षा के साथ देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों व चिकित्सा सहायता केंद्रों के कामकाज, गंगा सफाई और उसकी निगरानी के लिए गंगा चौकियों की स्थापना के कामकाज की भी समीक्षा की जाएगी। विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि अब तो न्यायालय ने भी कह दिया है कि सिर्फ विवाह के लिए होने वाला धर्मांतरण वैध नहीं है। यह भी लोभ की श्रेणी में आता है। विहिप इस मुद्दे को गांव-गांव ले जाएगी। साथ ही सभी को बताएगी कि मुसलमान और ईसाईयों की तरफ से किस-किस तरह धर्मांतरण कराया जा रहा है।
धर्मांतरण पर संघ प्रमुख भागवत के तेवर और तल्ख
धर्मांतरण के मुद्दे पर संघ के तेवर में और तल्खी आ गई है। अपने सहयोगी संगठनों की ओर से घर वापसी की कवायदों की वजह से चौतरफा आलोचना से घिरे होने के बावजूद उसने विपक्षी दलों को चुनौती दी है और कहा है कि अगर उन्हें धर्मांतरण इतना ही नागवार गुजर रहा है तो इसके खिलाफ संसद में कानून क्यों नहीं ले आते। हम अपना लूटा हुआ माल वापस ले रहे हैं तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों हो रही है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कोलकाता में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन में सरकार की ओर से प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह किसी को धर्मांतरण के जरिये हिंदू बनाना पसंद नहीं है उसी तरह हिंदुओं का धर्मांतरण कराना भी पसंद नहीं होना चाहिए। सम्मेलन में धर्मांतरण पर अपनी बेबाक राय रखते हुए भागवत ने कहा, ‘ हम एक सशक्त हिंदू समाज के निर्माण की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग इससे भटक कर दूर गए हैं वे अपनी मर्जी से नहीं गए हैं। उन्होंने फुसलाया गया है या फिर जबरदस्ती ले जाया गया है। अब चोरी पकड़ी जा रही है और हम अपना लूटा हुआ माल वापस ले रहे हैं तो किसी को आपत्ति क्यों हो रही है। इसमें नया तो कुछ नहीं है। अगर आपको यह पसंद नहीं है तो इसके खिलाफ कानून लाओ।
संघ प्रमुख ने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम अपने देश में हैं। हम कोई घुसपैठिये नहीं हैं। यह हमारा देश है। अपना हिंदू राष्ट्र। एक हिंदू आदमी अपनी धरती नहीं छोड़ेगा। हमने अतीत में जो खोया उसे हम हासिल करने की कोशिश करेंगे। हिंदुओं के उत्थान से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। जो लोग हिंदुओं के उत्थान के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं वे स्वार्थी हैं। वे अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं।
भागवत ने कहा कि हिंदू समाज किसी को दबाने में विश्वास नहीं करता। हिंदू लोग बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगों के अपराध को सह रहे हैं। विभाजन के पहले पाकिस्तान भी भारत का हिस्सा था। पाकिस्तान में हिंदुओं की कोई बड़ी तादाद नहीं है इसलिए वहां शांति नहीं है। भागवत ने कहा कि हिंदू इतने मजबूत हैं कि अपनी संपत्ति और गरिमा की रक्षा कर सकते हैं। आज दुनिया की बेहतरी के लिए एक मजबूत हिंदू समाज की जरूरत है। इस बीच, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने धर्मांतरण विरोधी बिल पर भागवत के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने मुलायम सिंह यादव से कहा,‘ मेरे भाई मुलायम, अगर धर्मांतरण अपराध है, चोरी अपराध है। अगर इसके खिलाफ कानून है तो फिर धर्मांतरण के खिलाफ कानून क्यों नहीं होना चाहिए। आप संसद में धर्मांतरण विरोधी कानून का विरोध क्यों कर रहे हैं। अगर आप धर्मांतरण विरोधी बिल लाते हैं तो हम आपका समर्थन करेंगे।