मोदी सरकार से संघ असंतुष्ट, अच्छे दिन नहीं आए!
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मोदी सरकार का हनीमून पीरियड वाकई खत्म हो गया है। विपक्ष के शुरू हो चुके हमलों के बाद अब आरएसएस ने दस माह के कामकाज को कसौटी पर कसने का निर्णय लिया है। नागपुर में 13 से 15 मार्च के बीच आयोजित होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ, मोदी सरकार के कामकाज की समीक्षा करेगा। इससे पहले संघ ने एक साल तक चुप्पी साधने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काम करने का मौका देने का फैसला किया था।
सरकार को अब बेअसर होता देख और दिल्ली की हार से संघ नेतृत्व अपने फैसले पर पुनर्विचार को मजबूर हुआ है। इस कवायद में संघ नेतृत्व ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को तलब कर उनसे सरकार और संगठन के कामकाज की विस्तृत जानकारी ली है। देशभर के प्रतिनिधियों को भावी रोडमैप बताने से पहले संघ नेतृत्व ने विभिन्न मुद्दों पर शाह के जरिये अपनी मंशा स्पष्ट की है। सरकार और संगठन, दोनों के अब तक के कामकाज से संघ परिवार संतुष्ट नहीं है।
मोदी सरकार के कामकाज को लेकर संघ के अंदरूनी आकलन में यह बात सामने आई है कि आम लोगों के अच्छे दिन अभी तक नहीं आए हैं। बल्कि मामलों को निपटाने में भी सरकार फिसड्डी साबित हो रही है। सूत्रों के मुताबिक अकेले पीएमओ के पास ही लगभग 2000 फाइलें निर्णय के लिए लंबित हैं। सरकार के अहम आला मंत्रालयों का आलम भी ऐसा ही है।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को संघ नेतृत्व के साथ हुई शाह की पांच घंटे से अधिक की मंत्रणा बैठक में भूमि अधिग्रहण विधेयक, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के सियासी गठबंधन के परिणाम और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई।
वैचारिक मुद्दों के भटकाव से भगवा राजनीति की राह मुश्किल
संघ का मानना है कि मनमोहन सरकार की आर्थिक विफलताओं के कारण बहुमत के साथ केंद्र में मोदी की सरकार बनी है। यदि मोदी सरकार आर्थिक मामलों को सही दिशा नहीं दे पाएगी तो भगवा राजनीति की राह मुश्किल हो सकती है। संघ को लगता है कि सत्ता के चलते उसके एक-एक वैचारिक मुद्दों की बलि चढ़ती जा रही है।
अटल बिहारी वाजपेयी के राजग शासन में पार्टी ने राम मंदिर मुद्दे को किनारे लगाया, अब पीडीपी के बहाने भाजपा आलाकमान ने धारा 370 पर यू टर्न मारा है। पीडीपी के साथ साझा न्यूनतम कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 की अनदेखी और सरकार बनने के बाद पीडीपी के तेवरों को देखते हुए संघ परिवार जम्मू-कश्मीर के सियासी समझौते को भगवा परिवार के लिए घाटे का सौदा मान रहा है।
वहीं, भूमि अधिग्रहण विधेयक पर संघ अपने संगठनों की मांग को सरकार से मनवाने पर अड़िग है। संघ का स्पष्ट मानना है कि वर्तमान अध्यादेश से किसानों को काफी नुकसान होगा।
दिल्ली में केजरीवाल कोटरी कर रही शासन: आरएसएस
‘आप’ में अंदर से उठ रही आवाजों के बीच आरएसएस ने आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्ध हो गया है कि यह पार्टी किसी भी अन्य ‘आम’ पार्टी से भी बदतर साबित हुई है। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा है कि दरअसल दिल्ली का शासन केजरीवाल मंडली के अधीन है, जिसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई जा सकती।
केजरीवाल की अनुपस्थिति में आप की पीएसी से बाहर किए गए योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के नेतृत्व में चले घटनाक्रम पर आरएसएस ने मोर्चा खोल दिया है। आरएसएस के मुखपत्र आर्गनाइजर में कहा गया है कि आप को वोट देने वाले दिल्ली के मतदाता और एनआरआई कुंठित हो रहे हैं। यह सोशल मीडिया के ट्रेंड से स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है।
इसके साथ ही आरएसएस के हिंदी मुखपत्र पांचजन्य में भी आप के आंतरिक लोकतंत्र पर निशाना साधा गया है। मालूम हो कि मुख्यमंत्री केजरीवाल इलाज के लिए बंगलूरू के जिंदल प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान में बृहस्पतिवार को 10 दिन के लिए भर्ती हुए हैं। दरअसल केजरीवाल अपनी पुरानी खांसी और अनियंत्रित शुगर के स्तर से परेशान हैं।