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देश 'पीके' झेल सकता है तो आमिर कैसे असुरक्षित हैं: RSS

Fri, 27 Nov 2015 11:58 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 Nov 2015 11:58 AM IST
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Rss men said if we can tolerate pk, then where is intolerance?

असहिष्णुता पर दिए गए अपने बयान के चलते आमिर खान का विवादों और बयानों से पीछा छूटता नहीं दिख रहा है। आमिर के बयान का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह प्रचारक प्रमुख नंद कुमार ने गुरुवार को कहा कि जो लोग असहिष्णुता का आरोप लगा रहे हैं वो लोग 'बौद्धिक आतंकवाद' के शिकार हैं।

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उन्होंने इस बात से इंकार किया कि 'आमिर खान का विरोध इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि वो मुस्लिम हैं। क्या उन पर कोई हमला हुआ? मैं एक आसान सवाल पूछ रहा हूं, क्या पीके जैसी फिल्म पाकिस्तान में बन सकती है? अगर देश पीके जैसी फिल्म सहन कर सकता है तो वो किस तरह से यहां असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।'
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उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी किरण यहां असुरक्षित महसूस कर रही है लेकिन क्या उन्होंने 26/11 हमले के बाद भी देश छोड़ने के बारे में सोचा था?

कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं

Rss men said if we can tolerate pk, then where is intolerance?

वहीं बढ़ती असहिष्णुता के बारे में सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक चाल है जो देश के विकास को रोकने के लिए चली जा रही है। उन्होंने कहा कि 'यह सिर्फ बौद्धिक आतंकवाद है।

जो लोग अपना पुरस्कार लौटा रहे हैं वो देश के लोगों का अपमान कर रहे हैं।' नंद कुमार ने कहा कि दिलीप कुमार और मीना कुमारी को यहां काम करने के लिए अपना नाम बदलना पड़ा लेकिन आज आप अपने नाम के साथ काम कर सकते हैं, यह सहिष्णुता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान-कैनेडी लेखक तारेक फताह ने भी कहा कि मुस्लिमों के लिए अगर कोई सुरक्षित देश है तो वह सिर्फ भारत है। नंद ने कहा कि सभी के पास अभिवयक्ति की आजादी है लेकिन किसी को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।

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